जौनपुर PWD अधिकारी पर हमला: विधायकों के प्रतिनिधियों पर बंधक बनाने और पीटने का आरोप-Jaunpur PWD officer attacked

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Jaunpur PWD officer attacked जौनपुर PWD अधिकारी पर हमला: विधायकों के प्रतिनिधियों पर बंधक बनाने और पीटने का आरोप, पुलिस जांच में जुटी – पूरी घटना की डिटेल्स

जौनपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ लेखाधिकारी राम मिलन यादव पर जानलेवा हमला और बंधक बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सत्ताधारी दलों के दो विधायकों – भाजपा के बदलापुर विधायक रमेश मिश्रा और निषाद पार्टी के शाहगंज विधायक रमेश सिंह – के प्रतिनिधियों पर यह आरोप लगाया गया है। पीड़ित अधिकारी का दावा है कि अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार के इशारे पर यह हमला हुआ, जबकि आरोपी पक्ष ने राम मिलन यादव पर भ्रष्टाचार और ठेकेदारों से मारपीट का आरोप लगाते हुए बचाव किया है। जौनपुर पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद छानबीन शुरू कर दी है, लेकिन विधायकों के दबाव में कार्रवाई में देरी का आरोप लग रहा है। इस घटना ने जौनपुर PWD कार्यालय में भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव और departmental feud को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना की पूरी टाइमलाइन: क्या हुआ दोपहर 2 बजे?

राम मिलन यादव के अनुसार, घटना 31 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2 बजे खरका तिराहा के पास स्थित PWD कार्यालय में घटी। वह अपने कार्यालय में बैठे थे, तभी अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाया। कक्ष में पहले से ही बदलापुर भाजपा विधायक रमेश मिश्रा के प्रतिनिधि गुड्डू प्रधान और शाहगंज निषाद पार्टी विधायक रमेश सिंह के प्रतिनिधि रजनीश सिंह मौजूद थे।

यादव ने बताया, “दोनों प्रतिनिधियों ने जबरन कुछ कागजों पर मेरा हस्ताक्षर कराना चाहा। मैंने आपत्ति जताई तो अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार नाराज हो गए। उनके उकसावे पर गुड्डू प्रधान और रजनीश सिंह ने मुझ पर जानलेवा हमला कर दिया। उन्होंने मुझे बुरी तरह पीटा।” हमले के दौरान कक्ष में राम मिलन यादव के मित्र लेखाधिकारी गौरव सिंह भी आ गए, जिन्हें भी बंधक बना लिया गया। दोनों को कक्ष में बंद कर दिया गया। काफी देर बाद पुलिस के पहुंचने पर वे मुक्त हो सके।

यह घटना जौनपुर PWD कार्यालय में departmental politics का नंगा चेहरा उजागर करती है। राम मिलन यादव ने लाइन बाजार थाने में गुड्डू प्रधान, रजनीश सिंह और अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार के खिलाफ तहरीर दी है। तहरीर में IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) और अन्य धाराओं का उल्लेख है।

पुलिस की प्रतिक्रिया: विधायकों के दबाव में आनाकानी?

पीड़ित अधिकारी ने गंभीर आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद दोनों विधायकों के फोन आने से पुलिस दबाव में आ गई। न तो मुकदमा दर्ज हुआ, न ही मेडिकल मुआयना कराया गया। थाना प्रभारी सतीश सिंह ने कहा, “तहरीर मिली है। छानबीन के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि, अब तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है, जिससे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।

जौनपुर SP और DM को शिकायत भेजी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जौनपुर में PWD विभाग में लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, और विधायकों के प्रतिनिधि अक्सर हस्तक्षेप करते हैं।

आरोपी पक्ष का पक्ष: राम मिलन यादव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

दूसरी ओर, आरोपी गुड्डू प्रधान ने राम मिलन यादव पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “राम मिलन यादव के मनमाने कामकाज से पिछले दो वर्षों से सभी ठेकेदार परेशान हैं। 10 प्रतिशत कमीशन के चक्कर में विभाग से बिल पास ही नहीं हो रहे। यादव दोपहर में कार्यालय आते हैं और चले जाते हैं। शुक्रवार को घर चले जाते हैं, फिर मंगलवार या बुधवार को लौटते हैं।”

गुड्डू प्रधान ने खुलासा किया कि राम मिलन यादव के खिलाफ अनुसूचित जाति (SC) के एक ठेकेदार से मारपीट का मामला दर्ज है, जिसमें SC-ST एक्ट लागू हुआ है। DM और SP से शिकायत के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। “हमने सिर्फ ठेकेदारों की परेशानी दूर करने के लिए बात की थी, लेकिन उन्होंने हम पर हमला का झूठा आरोप लगा दिया,” प्रधान ने कहा।

जौनपुर PWD में भ्रष्टाचार का काला इतिहास Jaunpur PWD officer attacked

यह पहला मामला नहीं है जब जौनपुर PWD विभाग सुर्खियों में आया हो। पिछले कुछ वर्षों में यहां कई ठेकेदारों ने कमीशन मांगने के आरोप लगाए हैं। खरका तिराहा क्षेत्र में सड़क निर्माण और पुल प्रोजेक्ट्स में अनियमितताओं की शिकायतें आम हैं। राम मिलन यादव को वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी के पद पर तैनात किया गया था, लेकिन उनके कामकाज पर सवाल उठते रहे।

स्थानीय ठेकेदार संघ के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “PWD में बिल पास कराने के लिए 8-10% कमीशन देना पड़ता है। राम मिलन यादव इस खेल के किंगपिन हैं। विधायकों के प्रतिनिधि ठेकेदारों की मदद के लिए आते हैं, लेकिन departmental feud में यह हिंसा हो गई।”

राजनीतिक रंग: सत्ताधारी दलों के विधायकों पर सवाल

घटना में शामिल बदलापुर भाजपा विधायक रमेश मिश्रा और शाहगंज निषाद पार्टी विधायक रमेश सिंह सत्ताधारी गठबंधन के हैं। उनके प्रतिनिधियों का नाम आने से विपक्ष ने हमला बोला है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता ने कहा, “PWD जैसे महत्वपूर्ण विभाग में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। विधायक अपने गुर्गों से departmental काम करवा रहे हैं।”

भाजपा और निषाद पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन जौनपुर में आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए यह मामला गरमा सकता है।

कानूनी प्रक्रिया और आगे क्या?

  • तहरीर की स्थिति: लाइन बाजार थाने में दी गई, लेकिन FIR लंबित।
  • मेडिकल रिपोर्ट: अभी तक नहीं हुई, पीड़ित के चोटों की पुष्टि बाकी।
  • जांच: पुलिस टीम गवाहों से पूछताछ कर रही है। CCTV फुटेज की जांच संभावित।
  • PWD विभाग की प्रतिक्रिया: उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई, इंक्वायरी शुरू हो सकती है।

यदि आरोप साबित हुए तो गुड्डू प्रधान और रजनीश सिंह पर गंभीर IPC धाराएं लग सकती हैं। वहीं, यदि भ्रष्टाचार के आरोप राम मिलन पर साबित हुए तो उनके खिलाफ SC-ST केस के साथ नया मुकदमा दर्ज हो सकता है।

जौनपुर PWD स्कैम: आंकड़ों में सच्चाई

जौनपुर जिले में PWD के तहत पिछले 3 वर्षों में 150 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स हुए, लेकिन 20% से ज्यादा बिल पेंडिंग हैं। CAG रिपोर्ट्स में भी departmental corruption का जिक्र है। ठेकेदारों की शिकायतों के अनुसार:

  • कमीशन दर: 8-12%।
  • प्रभावित प्रोजेक्ट्स: सड़क, पुल, ड्रेनेज।
  • प्रभावित ठेकेदार: 50+ छोटे-मझोले उद्यमी।
मुद्दापीड़ित पक्ष (राम मिलन)आरोपी पक्ष (गुड्डू प्रधान)
मुख्य आरोपजानलेवा हमला, बंधक बनानाभ्रष्टाचार, 10% कमीशन, मनमानी
पुलिस कार्रवाईआनाकानी का आरोपछानबीन की मांग
पृष्ठभूमिवरिष्ठ लेखाधिकारीविधायकों के प्रतिनिधि
अन्य केस–SC ठेकेदार पर मारपीट (SC-ST एक्ट)

प्रभाव: जौनपुर के विकास पर असर

यह घटना जौनपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्रभावित कर सकती है। खरका तिराहा से शाहगंज तक सड़क प्रोजेक्ट रुके पड़े हैं। ठेकेदार डर रहे हैं, और departmental feud से काम प्रभावित हो रहा है। स्थानीय निवासी चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो और दोषी सजा पाएं।

जौनपुर DM ने कहा, “मामले की गंभीरता से संज्ञान लिया गया है। उच्च स्तरीय जांच होगी।” SP कार्यालय से भी जांच तेज करने की बात कही गई है।

सत्ता का दुरुपयोग या भ्रष्टाचार का पर्दाफाश?

जौनपुर PWD हमला मामला सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के बीच की जंग का प्रतीक बन गया है। क्या विधायकों के प्रतिनिधि निर्दोष हैं या राम मिलन यादव भ्रष्ट? पुलिस छानबीन ही सच्चाई उजागर करेगी। जौनपुरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि न्याय हो और विभाग साफ हो।


जौनपुर में PWD के वरिष्ठ लेखाधिकारी राम मिलन यादव पर सत्ताधारी विधायकों के प्रतिनिधियों द्वारा बंधक बनाने और पीटने का सनसनीखेज आरोप लगा है। बदलापुर भाजपा विधायक रमेश मिश्रा के प्रतिनिधि गुड्डू प्रधान और शाहगंज निषाद पार्टी विधायक रमेश सिंह के प्रतिनिधि रजनीश सिंह पर हमले का इल्जाम है। पीड़ित का कहना है कि अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार के इशारे पर यह घटना हुई। जौनपुर पुलिस छानबीन में जुटी है, लेकिन विधायकों के दबाव में कार्रवाई न होने का आरोप। आरोपी पक्ष ने राम मिलन पर भ्रष्टाचार लगाया।

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अनिल शुक्ला

अनिल शुक्ला स्पेशल करेस्पोंडेंस रिलाएबल मीडिया भारत बस्ती ,उत्तर प्रदेश है RMB में 10 वर्षो से रहकर पत्रकारिता कर रहे है।