डॉक्टर अनीस ने भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग
कूटरचित दस्तावेजों से नामांतरण कराने का आरोप, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
प्रयागराज। चकिया क्षेत्र के रहने वाले डॉक्टर अनीस ने अपनी जमीन पर कथित कब्जे और भूमाफियाओं के दबाव को लेकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉक्टर अनीस ने आरोप लगाया कि लखनपुर क्षेत्र में स्थित उनकी जमीन को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। मामला वर्तमान में एसडीएम न्यायालय में लंबित है और अभी तक जमीन की पैमाइश भी नहीं कराई गई है। इसके बावजूद कुछ लोग कथित तौर पर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
डॉक्टर अनीस का कहना है कि जमीन से संबंधित विवाद को लेकर उन्होंने पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी है। उनका आरोप है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन को निष्पक्ष तरीके से पूरे प्रकरण की जांच करानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।
2001 में कूटरचित दस्तावेजों का लगाया आरोप
पत्रकार वार्ता के दौरान डॉक्टर अनीस ने बताया कि वर्ष 2001 में कुछ लोगों पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उनकी जमीन को अपने नाम कराने का आरोप सामने आया था। उनके मुताबिक, शिकायत किए जाने के बाद संबंधित बैनामा निरस्त कर दिया गया था। उनका कहना है कि दस्तावेजों से जुड़े मामले में कार्रवाई होने के बावजूद संबंधित लोग लंबे समय से उनकी जमीन पर नजर बनाए हुए हैं।
डॉक्टर अनीस ने आरोप लगाया कि जमीन को लेकर पुराने विवाद के बावजूद कुछ लोग लगातार किसी न किसी तरीके से जमीन पर अपना दावा जताने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जमीन की पैमाइश तक नहीं हुई है, तब किसी भी व्यक्ति द्वारा जमीन पर कब्जे की कोशिश करना गंभीर विषय है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले में पुराने दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और नामांतरण से संबंधित कागजात की जांच कराई जाए। साथ ही जमीन की मौके पर पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
एसडीएम न्यायालय में लंबित है मामला
डॉक्टर अनीस के अनुसार, लखनपुर स्थित जमीन का मामला फिलहाल एसडीएम न्यायालय में लंबित है। उनका कहना है कि जब विवाद का न्यायिक स्तर पर समाधान होना बाकी है, ऐसे में किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जमीन की पैमाइश अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति जमीन पर कब्जे की कोशिश करता है तो इससे विवाद और बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मौके की स्थिति का सत्यापन कराने और राजस्व विभाग के माध्यम से नियमानुसार पैमाइश कराने की मांग की है।
डॉक्टर अनीस ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाना है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से जमीन के स्वामित्व अथवा नामांतरण में गड़बड़ी की गई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
दबंग लोगों के हस्तक्षेप का भी आरोप
डॉक्टर अनीस ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह भी आरोप लगाया कि जमीन के विवाद में कुछ दबंग और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का हस्तक्षेप है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों के दबाव के कारण जमीन को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मामले को केवल जमीन के विवाद के रूप में न देखा जाए, बल्कि इससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा दबाव बनाकर अथवा प्रभाव का इस्तेमाल करके जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है तो प्रशासन को इसकी भी जांच करनी चाहिए।
डॉक्टर अनीस ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी विवादित संपत्ति पर जबरन कब्जे की कोशिश को रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने मामले की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट कर दी तो भविष्य में किसी बड़े विवाद की संभावना को रोका जा सकता है।
राजस्व अभिलेखों की जांच की मांग
डॉक्टर अनीस ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले जमीन से संबंधित सभी राजस्व अभिलेखों की जांच की जाए। इसके बाद पुराने बैनामे, नामांतरण और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। उनका आरोप है कि वर्ष 2001 में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जमीन को अपने नाम कराने का प्रयास किया गया था और शिकायत के बाद संबंधित बैनामा निरस्त हुआ था।
उन्होंने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेजों को रिकॉर्ड के आधार पर जांचा जाए, जिससे यह पता चल सके कि जमीन के संबंध में किस समय क्या कार्रवाई हुई और किन परिस्थितियों में नामांतरण अथवा बैनामे से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ी।
उनका कहना है कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े मामलों में दस्तावेज ही सबसे महत्वपूर्ण आधार होते हैं। इसलिए किसी भी दावे को स्वीकार करने से पहले राजस्व रिकॉर्ड और पंजीकृत दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन किया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई
डॉक्टर अनीस ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस मामले की जांच किसी पूर्वाग्रह के बिना की जाए। उनका कहना है कि यदि उनके दस्तावेज और दावा सही है तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए और यदि जांच में किसी दूसरे पक्ष का दावा सही पाया जाता है तो कानून के अनुसार निर्णय होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग निष्पक्ष जांच है। प्रशासन मौके की जांच, जमीन की पैमाइश और दस्तावेजों के सत्यापन के माध्यम से विवाद की वास्तविक स्थिति सामने ला सकता है। इससे न केवल संबंधित पक्षों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में जमीन को लेकर होने वाले विवादों पर भी रोक लगाई जा सकेगी।
डॉक्टर अनीस ने यह भी कहा कि वह मामले को कानून के दायरे में रहकर आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि किसी व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन अथवा फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है तो उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
पत्रकार वार्ता के अंत में डॉक्टर अनीस ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन मामले में निष्पक्ष कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि जमीन को लेकर विवाद पुराना है और वर्ष 2001 में सामने आए दस्तावेजों से जुड़े मामले के बाद भी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। वर्तमान में मामला एसडीएम न्यायालय में लंबित होने के बावजूद जमीन पर कब्जे के कथित प्रयास चिंता का विषय हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जमीन की जल्द से जल्द पैमाइश कराई जाए, राजस्व अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए तथा यदि किसी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से कब्जे या दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
डॉक्टर अनीस ने कहा कि किसी भी जमीन विवाद का समाधान कानून और दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि विवाद का स्थायी समाधान निकल सके।
गौरतलब है कि डॉक्टर अनीस द्वारा लगाए गए कूटरचित दस्तावेज, कब्जे के प्रयास और दबंग लोगों के हस्तक्षेप संबंधी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों पर संबंधित दूसरे पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

Reliable media Desk 24/7

