प्रयागराज में घर पर जबरन कब्जे का मामला: पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से न्याय की लगाई गुहार, फर्जी दस्तावेजों का आरोप
प्रयागराज में घर पर जबरन कब्जे का मामला: पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से न्याय की लगाई गुहार, फर्जी दस्तावेजों का आरोप
प्रयागराज, 12 फरवरी 2026: प्रयागराज के कर्नलगंज थाना क्षेत्र के छोटा बघाड़ा इलाके में एक मकान को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। पीड़ित परिवार ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ दिनों पहले उनके पैतृक मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया गया और अब उस पर अवैध कब्जे की साजिश रची जा रही है। परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की गुहार लगाई है। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि और परिवार का दावा
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि विवाद का केंद्र बिंदु छोटा बघाड़ा का एक पुराना मकान है, जो वर्ष 1975 से प्रयागराज नगर निगम के अभिलेखों में उनके नाम दर्ज है। परिवार का दावा है कि उन्होंने समय-समय पर हाउस टैक्स का भुगतान किया है और मकान के सभी कानूनी दस्तावेज उनके पास सुरक्षित हैं। परिवार के एक सदस्य, ने प्रेस वार्ता में कहा, “यह हमारा पैतृक घर है। हमारे पूर्वजों ने सालों की मेहनत से इसे बनाया। लेकिन अब कुछ लोग फर्जी दस्तावेज बनाकर हमें बेघर करने पर तुले हैं।”
परिवार के अनुसार, कुछ दिन पूर्व अज्ञात लोगों ने मकान की दीवारें तोड़ दीं और मुख्य द्वार को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद से ही मकान पर अवैध कब्जे के प्रयास तेज हो गए हैं। पीड़ितों ने वीडियो और फोटो प्रमाण भी पत्रकारों को दिखाए, जिसमें मकान की क्षतिग्रस्त हालत साफ नजर आ रही है। परिवार ने आरोप लगाया कि एक स्थानीय अधिवक्ता इस साजिश का मुख्य सूत्रधार है, जो कथित फर्जी बैनामा दस्तावेज तैयार कर रहा है। अधिवक्ता पर राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर प्रशासन पर दबाव बनाने का भी इल्जाम लगाया गया है।
फर्जी दस्तावेज और राजनीतिक दबाव के आरोप
प्रेस वार्ता में बोलते हुए पीड़ित परिवार की एक महिला सदस्य ने रोते हुए कहा, “हम गरीब हैं, लेकिन कानून सबका बराबर होना चाहिए। उस अधिवक्ता ने पुराने फर्जी कागजात बनाए और बैनामा कराने की कोशिश की। जब हमने विरोध किया तो हमें धमकियां मिलने लगीं।” परिवार का कहना है कि अधिवक्ता से जुड़े कुछ राजनीतिक नेता इस मामले में संलिप्त हैं। उन्होंने नाम लिए बिना कहा कि स्थानीय स्तर पर इन लोगों का दबदबा है, जिसके कारण पुलिस और प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
परिवार ने दावा किया कि उन्होंने कर्नलगंज थाने में कई शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, उनके एक सदस्य के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। परिवार को अन्य मामलों में फंसाने की धमकियां भी मिल रही हैं। एक पीड़ित ने कहा, “हमारी बेटी की शादी आने वाली है, लेकिन ये लोग हमें मानसिक रूप से तोड़ना चाहते हैं। मुख्यमंत्री जी से अपील है कि न्याय करें।” इस दौरान पत्रकारों ने परिवार के दस्तावेजों की जांच की, जो नगर निगम रिकॉर्ड से मेल खाते नजर आए।
प्रशासन की चुप्पी और शिकायतों का क्या हुआ?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन क्यों खामोश है? पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी कार्यालय, नगर निगम और पुलिस को भी अवगत कराया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि छोटा बघाड़ा इलाका गरीबों का बाहुल्य वाला क्षेत्र है, जहां भूमि विवाद आम हैं। लेकिन इस बार मामला गंभीर लग रहा है क्योंकि फर्जी दस्तावेजों का मुद्दा जुड़ गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नगर निगम रिकॉर्ड में मकान परिवार के नाम है, तो कब्जा अवैध ही माना जाएगा। उत्तर प्रदेश में भूमि विवादों से निपटने के लिए ‘भूमि विवाद निस्तारण अधिनियम’ मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल कमजोर है। एक वकील ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “राजनीतिक पैरवी होने पर छोटे विवाद भी बड़े हो जाते हैं। पीड़ितों को हाईकोर्ट जाना पड़ सकता है।”
मुख्यमंत्री को पत्र और सोशल मीडिया पर हलचल
पीड़ित परिवार ने प्रेस वार्ता के दौरान ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। ज्ञापन में लिखा है, “मुख्यमंत्री जी, हम आपके ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर भरोसा करते हैं। कृपया दोषियों को सजा दिलवाएं।”
स्थानीय भाजपा और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी मामले पर टिप्पणी की। भाजपा नेता ने कहा, “यदि राजनीतिक दबाव है तो जांच होगी।” वहीं विपक्ष ने प्रशासन पर निशाना साधा। इस घटना ने प्रयागराज में भूमि माफिया की सक्रियता पर फिर बहस छेड़ दी है। याद रहे, योगी सरकार ने गुजरात मॉडल पर भूमि सुधार शुरू किए हैं, लेकिन जमीनी चुनौतियां बरकरार हैं।
छोटा बघाड़ा: विवादों का केंद्र
छोटा बघाड़ा प्रयागराज का एक घनी आबादी वाला इलाका है, जहां ज्यादातर मजदूर और छोटे व्यापारी रहते हैं। यहां भूमि विवाद पुराने हैं। पिछले दो वर्षों में दर्जनों कब्जे की घटनाएं रिपोर्ट हुईं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गरीबी के कारण लोग आवाज नहीं उठा पाते। एक बुजुर्ग निवासी ने बताया, “पैसे वालों का राज चलता है। गरीबों का कोई सुनने वाला नहीं।” प्रशासन ने कभी-कभी ड्राइव चलाई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं।
इस मामले ने पूरे प्रयागराज को हिला दिया है। पीड़ित परिवार की प्रेस वार्ता में 20 से अधिक मीडिया चैनल मौजूद थे। परिवार ने कहा कि वे हाईकोर्ट जाने को तैयार हैं, लेकिन पहले प्रशासनिक स्तर पर न्याय चाहते हैं।
कानूनी प्रावधान और संभावित कार्रवाई
कानूनी रूप से देखें तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 441 (आपराधिक प्रवेश) और 447 (अवैध कब्जा) के तहत कार्रवाई हो सकती है। यदि फर्जी दस्तावेज साबित हुए तो धारा 420 (धोखाधड़ी) और 467 (जालसाजी) लागू होंगी। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत नगर निगम रिकॉर्ड ही अंतिम सत्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिली तो एसएसपी स्तर पर जांच हो सकती है।
परिवार ने अपील की कि जांच में राजनीतिक प्रभाव न घुसपैठ करे। इस बीच, कर्नलगंज थाने से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। डीआईजी प्रयागराज ने कहा, “मामले की जानकारी ली जा रही है।”
सामाजिक प्रभाव और सबक
यह घटना उत्तर प्रदेश में भूमि विवादों की जटिलता को उजागर करती है। प्रयागराज जैसे शहरों में शहरीकरण के कारण पुराने मकानों पर कब्जे बढ़ रहे हैं। गरीब परिवार अक्सर शिकार होते हैं। सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी योजनाओं के बावजूद सामाजिक न्याय का सवाल बरकरार है। पीड़ित परिवार की गुहार ने एक बार फिर योगी सरकार की ‘शून्य सहनशीलता’ नीति की परीक्षा ली है।







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