नैनी में ब्राह्मण बेटियों से बदसलूकी विरोध करना पड़ा भारी, ब्राह्मण शिक्षक पर जानलेवा हमला

Please Share

प्रयागराज। नैनी क्षेत्र में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। रामनगर चौराहे के पास कोचिंग से घर लौट रही ब्राह्मण मां और उसकी दो बेटियों के साथ कथित रूप से बदसलूकी किए जाने के बाद विरोध करना परिवार के लिए भारी पड़ गया। आरोप है कि बेटियों के साथ हुई अभद्रता की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे उनके मामा और शिक्षक प्रदीप द्विवेदी पर आरोपियों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में प्रदीप द्विवेदी गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में कार्रवाई जारी है।

कोचिंग से घर लौट रही थीं मां और बेटियां

उपलब्ध जानकारी के अनुसार नैनी के शिवनगर इलाके की रहने वाली मंजू तिवारी अपनी दो बेटियों के साथ शनि मंदिर स्थित कोचिंग से घर लौट रही थीं। आरोप है कि रामनगर चौराहे के पास बाइक सवार विशाल भारतीय और विशाल पाल ने उनका रास्ता रोककर बदसलूकी की।

मंजू तिवारी की ओर से इसका विरोध किए जाने पर कथित तौर पर गाली-गलौज शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने अपने भाई और शिक्षक प्रदीप द्विवेदी को इसकी जानकारी दी।

परिवार की शिकायत की जानकारी मिलने के बाद प्रदीप द्विवेदी मौके पर पहुंचे। आरोप है कि वहां पहले से मौजूद लोगों और उनके अन्य साथियों ने प्रदीप द्विवेदी पर हमला कर दिया।

लाठी-डंडों और धारदार हथियार से हमला

पुलिस के मुताबिक प्रदीप द्विवेदी के पहुंचने के बाद आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की। रिपोर्ट के अनुसार उन पर लाठी-डंडों और धारदार हथियार से हमला किया गया। गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि मामला महिलाओं और बेटियों के साथ कथित बदसलूकी के विरोध से शुरू हुआ और देखते ही देखते एक व्यक्ति पर गंभीर हमले तक पहुंच गया।

घटना के बाद परिवार में भय और चिंता का माहौल है। परिजनों का कहना है कि यदि सार्वजनिक स्थान पर महिलाओं और बच्चियों के साथ इस तरह की घटनाएं होती हैं और विरोध करने वाले व्यक्ति पर ही हमला कर दिया जाता है तो आम परिवारों के सामने सुरक्षा का बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है।

पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम माना जा सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर क्या व्यवस्था की जाती है।

महिलाओं और बच्चियों के साथ छेड़छाड़ अथवा अभद्रता की शिकायतों को गंभीरता से लेना और शुरुआती स्तर पर ही प्रभावी कार्रवाई करना कानून-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यदि किसी घटना का समय रहते संज्ञान लिया जाए तो कई बार स्थिति को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे शिक्षक

इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू प्रदीप द्विवेदी की गंभीर हालत है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार हमले में गंभीर रूप से घायल शिक्षक का अस्पताल में इलाज चल रहा है। परिवार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता उनके स्वास्थ्य को लेकर है।

एक तरफ पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ परिवार अपने घायल सदस्य के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहा है।

यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। घटना ने यह सवाल भी सामने रखा है कि यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार की महिलाओं और बच्चियों के साथ कथित बदसलूकी का विरोध करता है और इसके जवाब में उस पर जानलेवा हमला हो जाता है, तो समाज में कानून का भय और नागरिकों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाए।

कार्रवाई हुई, लेकिन सुरक्षा को लेकर सवाल बरकरार

सूचना के अनुसार आरोपियों की गिरफ़्तारी के प्रयास जारी है। यानी घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हुई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिसिंग की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाना चाहिए।

नैनी जैसे बड़े क्षेत्र में बाजार, चौराहे, कोचिंग संस्थान और आवासीय इलाके हैं। शाम के समय कोचिंग से घर लौटने वाली छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी की जरूरत महसूस की जा सकती है। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस गश्त, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और शिकायत मिलने पर तत्काल प्रतिक्रिया जैसे कदम अपराध की रोकथाम में मदद कर सकते हैं।

अपराध पर राजनीति नहीं, जवाबदेही जरूरी

घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि किसी भी सरकार या राजनीतिक दल के बारे में यह निष्कर्ष निकालना कि वह अपराध रोकने में पूरी तरह विफल है, एक व्यापक राजनीतिक मूल्यांकन होगा। इस घटना के संदर्भ में इतना जरूर कहा जा सकता है कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठे हैं और स्थानीय स्तर पर प्रभावी पुलिसिंग की आवश्यकता सामने आई है।

सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती केवल इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है। चुनौती यह भी है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले, घायल प्रदीप द्विवेदी को बेहतर चिकित्सा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था दिखाई दे।

परिवार को न्याय और सुरक्षा की उम्मीद

प्रदीप द्विवेदी के परिवार और परिचितों की निगाहें अब पुलिस और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर हैं। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना में कौन-कौन शामिल था, हमला किस परिस्थिति में हुआ और घटना से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि जांच में किस प्रकार होती है।

मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई ही आगे का रास्ता है। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाना पुलिस और अभियोजन की जिम्मेदारी होगी।

नैनी की यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ती है कि शहर में महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए पुलिस व्यवस्था को और कितना मजबूत किया जाना चाहिए। घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन जनता की नजर अब इस बात पर है कि यह कार्रवाई आगे चलकर सुरक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव में बदलती है या नहीं।

फिलहाल गंभीर रूप से घायल शिक्षक प्रदीप द्विवेदी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। परिवार उनके स्वस्थ होने की उम्मीद लगाए बैठा है और साथ ही यह भी चाहता है कि मामले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच के बाद कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

CrimePrayagrajUttar Pradesh

Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।