प्रयागराज करछना पावर प्रोजेक्ट: 18 साल बाद किसानों की जमीन वापसी मांग, SDM को ज्ञापन-Farmers get their land back after 18 years
प्रयागराज Farmers get their land back after 18 years करछना तहसील में 23 दिसंबर 2025 को मंगलवार को समाज उत्थान समिति के प्रबंधक डॉ. कुलभूषण सिंह पटेल के नेतृत्व में किसानों ने उप जिलाधिकारी भारती मीणा को ज्ञापन सौंपा। करछना पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित लगभग 2500 बीघा भूमि को काश्तकारों को लौटाने की प्रमुख मांग की गई। आठ गांवों के ग्राम प्रधानों और किसानों के हस्ताक्षरयुक्त इस ज्ञापन ने किसानों की लंबे समय की पीड़ा को उजागर किया।
ज्ञापन के मुख्य बिंदु
ज्ञापन में किसानों ने साफ कहा कि 18 वर्ष पूर्व अधिग्रहित की गई जमीन पर आज तक कोई पावर प्लांट नहीं बना, न ही भूमि वापस की गई। यदि भूमि न लौटाई जाए तो किसानों की सहमति से नए सिरे से अधिग्रहण कर वर्तमान सर्किल रेट पर प्रतिकर दिया जाए। इसके अलावा, भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो रही है और अधिग्रहित भूमि के आसपास जंगली जानवर फसलें बर्बाद कर रहे हैं।
- पावर प्रोजेक्ट के अलावा कोई अन्य योजना न चले, काश्तकारों या उनके आश्रितों को रोजगार दिया जाए।
- प्रोजेक्ट बनने पर शासनादेशानुसार सभी सुविधाएं प्रदान हों।
ये मांगे करछना के कचरी, कचरा मेड़रा, देहली, भगेसर, ढोलीपुर, भिटार, देवरी कला, गढ़वा कला जैसे गांवों के काश्तकारों की हैं.
प्रोजेक्ट का इतिहास और वर्तमान स्थिति
करछना पावर प्रोजेक्ट की अधिग्रहण प्रक्रिया करीब दो दशक पुरानी है, जब उत्तर प्रदेश सरकार ने 273 हेक्टेयर से अधिक भूमि ली थी। लगभग 1900 किसानों को 64 करोड़ रुपये मुआवजा मिला, लेकिन 32 किसानों ने अस्वीकार कर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ मामलों में अधिग्रहण रद्द कर खतौनी बहाल की, फिर भी प्रोजेक्ट ठप पड़ा है।
प्रशासन ने 11 करोड़ रुपये खर्च कर चहारदीवारी और पिलर लगाए, लेकिन अब कई जगह क्षतिग्रस्त हैं। हाल ही में किसानों ने जिलाधिकारी को भी इसी मुद्दे पर ज्ञापन दिया। 19 अक्टूबर 2025 को समिति द्वारा आयोजित किसान महापंचायत में ये मुद्दे प्रमुखता से उठे थे।
किसानों की पीड़ा और जंगली जानवरों का कहर
अधिग्रहित भूमि न लौटने से काश्तकार बेरोजगार हो गए, भुखमरी का सामना कर रहे हैं। आसपास की गैर-अधिग्रहित जमीन पर नीलगाय, सुअर, शाही जैसे जंगली जानवर फसलें चट कर रहे हैं। इससे किसान आर्थिक रूप से टूट चुके हैं और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
समिति के संरक्षक शिव बहादुर पटेल और प्रबंधक डॉ. कुलभूषण सिंह पटेल ने नेतृत्व किया। पूर्व प्रधान संघ अध्यक्ष कृष्ण मुरारी पांडेय सहित कई किसान उपस्थित रहे। ये सामाजिक कार्यकर्ता प्रयागराज में किसान हितों के लिए सक्रिय हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीदें Farmers get their land back after 18 years
उप जिलाधिकारी भारती मीणा ने ज्ञापन ग्रहण किया, जो करछना तहसील में सक्रिय हैं। हाल के समाधान दिवसों में भी भूमि विवाद प्रमुख रहे। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि शासन इस पर त्वरित कार्रवाई करेगा।
यदि पावर प्रोजेक्ट आगे बढ़े तो काश्तकार रोजगार और सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। अन्यथा, भूमि पूर्ण रूप से लौटाने या नए मुआवजे की मांग तेज होगी। प्रयागराज जिले में ऐसे विवाद किसानों की आजीविका से जुड़े हैं।
करछना पावर प्रोजेक्ट प्रयागराज भूमि अधिग्रहण विवाद 2025 में फिर सुर्खियों में है। डॉ. कुलभूषण सिंह पटेल जैसे समाजसेवक किसान आंदोलन को मजबूत कर रहे। प्रयागराज समिति के प्रयासों से किसानों को न्याय मिलने की संभावना बढ़ी है।

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

