मेरठ में SIR कार्य के दबाव से टूटा BLO, जहर खाकर की आत्महत्या की कोशिश;BLO broke down due to work pressure
मेरठ, 3 दिसंबर 2025 ब्यूरो : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने काम के अत्यधिक दबाव और सुपरवाइजर की कथित प्रताड़ना से तंग आकर जहर खा लिया।
35 वर्षीय मोहित चौधरी, जो सिंचाई विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात हैं, की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वे अभी भी खतरे के बाहर नहीं हैं।परिजनों के अनुसार, मोहित पल्लवपुरम क्षेत्र के वार्ड 57 के बूथ नंबर 18 पर SIR कार्य में लगे हुए थे।
कीटनाशक दवा का सेवन BLO broke down due to work pressure
मंगलवार देर शाम वे घर लौटे और छत पर जाकर कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया। परिवार ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उनकी हालत बिगड़ चुकी थी। मोहित की पत्नी ज्योति चौधरी ने भावुक होकर बताया, “मेरे पति पर सुपरवाइजर आशीष शर्मा लगातार दबाव बना रहे थे। वे बार-बार फोन करके सस्पेंड करने और FIR दर्ज कराने की धमकी देते थे। SIR का टारगेट पूरा न होने पर वे उन्हें मानसिक रूप से तोड़ रहे थे। मोहित का काम 72-74 प्रतिशत ही पूरा हो पाया था, लेकिन दबाव इतना था कि वे डिप्रेशन में चले गए।” ज्योति ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी सुपरवाइजर पर सख्त कार्रवाई की जाए।
घटना ने हिलाया प्रशासनिक तंत्र, यूनियन ने की कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही विभागीय यूनियन के सदस्य और अन्य BLO सहयोगी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने सुपरवाइजर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा किया। यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर एक्शन नहीं लिया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। ADM (इलेक्शन) सत्य प्रकाश सिंह भी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने कहा, “प्रारंभिक जांच में कार्य-संबंधी दबाव की बात सामने नहीं आई है। मोहित का SIR फॉर्म काफी हद तक पूरा था। कारण घरेलू या अन्य भी हो सकते हैं, लेकिन पूरी जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल, मोहित खतरे से बाहर हैं, लेकिन वे बात करने की स्थिति में नहीं हैं।”मेरठ के डीएम ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को जांच के निर्देश दिए हैं। मुंडाली थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बयान दर्ज किए हैं। यह घटना SIR अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है, जहां BLO जैसे ग्रासरूट कार्यकर्ताओं पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
देशभर में SIR दबाव के कारण BLO की मौतें: एक चिंताजनक ट्रेंड
यह मामला मेरठ का पहला नहीं है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। INC के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया गया कि “SIR के दबाव में अब तक देश में 35 BLO की जान जा चुकी है। नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग के ज्ञानेश कुमार इसे ‘वोट चोरी’ के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जो अब निर्दोषों की जान ले रहा है।” हाल ही में जयपुर, गोंडा और अन्य जगहों पर भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जहां BLO ने काम के बोझ से परेशान होकर आत्महत्या की कोशिश की।
विशेषज्ञों का मानना है कि SIR जैसे अभियानों में BLO को अपर्याप्त ट्रेनिंग और संसाधनों के साथ मैदान में उतार दिया जाता है। टारगेट पूरा न होने पर सस्पेंशन की धमकियां आम हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। एक BLO यूनियन नेता ने कहा, “ये कर्मचारी परिवार चलाने वाले हैं। उन्हें सिर्फ नंबर समझना बंद करें।”
परिवार का दर्द: पिता की मौत के बाद मिली नौकरी, अब यह हाल
मोहित के परिवार ने बताया कि उनके पिता की मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे से उन्हें नौकरी मिली थी। वे परिवार की पूरी जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन दोहरी ड्यूटी (सिंचाई विभाग + SIR) ने उन्हें तोड़ दिया। मोहित के दो बच्चे हैं, और परिवार अब आर्थिक-सामाजिक संकट से जूझ रहा है। पड़ोसियों ने अस्पताल के बाहर मोमबत्ती मार्च निकालकर न्याय की मांग की।प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मोहित के इलाज का पूरा खर्च विभाग वहन करेगा और जांच पूरी होने पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना सरकारी नौकरियों में मानसिक स्वास्थ्य नीतियों की कमी को उजागर करती है।
यदि आप या आपके जानने वाले तनाव में हैं, तो हेल्पलाइन 104 पर संपर्क करें।

रणधीर आनंद पांडेय ब्यूरो चीफ रिलाएबल मीडिया भारत बस्ती ,उत्तर प्रदेश है RMB में 10 वर्षो से रहकर पत्रकारिता कर रहे है।

