राजा भैया के साथ हुआ चमत्कार : देवराहा बाबा के आशीर्वाद की अनसुनी कहानी -Miracle happened with Raja Bhaiya

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प्रतापगढ़। Miracle happened with Raja Bhaiya उत्तर प्रदेश की सियासत में एक ऐसा नाम जो कभी सुर्खियों से दूर नहीं रहता, वह है रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया। कुंडा विधानसभा से लगातार कई बार विधायक चुने गए राजा भैया भदरी रियासत के वर्तमान उत्तराधिकारी हैं।

बहुबली छवि, विवादों का केंद्र और फिर भी जनता के बीच गजब की पकड़ रखने वाले इस नेता के जीवन में एक ऐसी घटना घटी जो आज भी लोग चमत्कार ही मानते हैं। यह कहानी है सालों पुरानी, जब राजा भैया हाईस्कूल में पढ़ते थे और एक भयानक बाइक एक्सीडेंट के बाद उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।

हाल ही में देवराहा बाबा के अनुयायियों के एक बड़े आयोजन में राजा भैया मंच पर पहुंचे। वहां उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से उस चमत्कार की पूरी कहानी बयान की जो उनके साथ हुआ था।

भावुक स्वर में राजा भैया ने बताया, “मेरे पिता उदय प्रताप सिंह जी शुरू से ही देवराहा बाबा सरकार के भक्त रहे। मेरे जन्म से पहले ही उन्होंने बाबा से आशीर्वाद लिया था और उसी आशीर्वाद से मेरा नाम रघुराज प्रताप सिंह रखा गया। बचपन से मैं बाबा के दर्शन करने जाता रहा।”फिर उन्होंने उस हादसे का जिक्र किया जो उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना।

एक दिन बहुत भयानक एक्सीडेंट हो गया Miracle happened with Raja Bhaiya

राजा भैया ने कहा, “जब मैं इंटरमीडिएट में था, उम्र करीब 16-17 साल रही होगी। उस उम्र में हर लड़के को बाइक का शौक चढ़ता है। मैं भी तेज रफ्तार से बाइक भगाता था, स्टंट मारता था। घर वाले, रिश्तेदार, शुभचिंतक सब समझाते थे कि संभल कर चलाया करो, लेकिन जवानी का जोश कहां मानता है। एक दिन बहुत भयानक एक्सीडेंट हो गया।

बाइक अनियंत्रित होकर पलट गई और मेरा चेहरा सीधे सड़क पर जा टकराया। चोट इतनी गंभीर थी कि खून बहने लगा और चेहरा पूरी तरीके से सूज गया।”परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने एक्स-रे किया तो पता चला कि निचला जबड़ा (मैंडिबल) पूरी तरह क्रैक हो चुका है।

ऑपरेशन करना जरूरी था। तार डालकर दोनों जबड़ों को जोड़ना था, लेकिन चेहरे पर सूजन इतनी ज्यादा थी कि तुरंत सर्जरी मुमकिन नहीं थी। डॉक्टर ने दवा देकर कहा, “सूजन कम होने दो, फिर लेकर आना।” घर लौटते समय राजा भैया कुछ भी ठोस खा-पी नहीं पा रहे थे।

बोलना भी मुश्किल था। लिक्विड डाइट ही दी जा रही थी – दूध, जूस, दाल का पानी, पतला दलिया। दर्द और तकलीफ इतनी थी कि रातें करवटें बदलते गुजरती थीं।उधर, राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह ने पत्नी से कहा, “इसे लेकर देवराहा बाबा के पास चलो। सरकार का आशीर्वाद ही सब ठीक कर देगा।” मां ने हामी भरी और अगले ही दिन सूजन से भरे चेहरे के साथ राजा भैया को लेकर देवराहा बाबा के आश्रम पहुंच गईं।

वहां का नजारा आज भी राज Rnराजा भैया की आंखों में तैर जाता है। बाबा ऊंचे बांस के मचान पर विराजमान थे। भीड़ लगी थी, लेकिन जैसे ही राजा भैया नजर आए, बाबा ने इशारा किया और उन्हें ऊपर बुलाया।राजा भैया बताते हैं, “मैं रास्ते भर सोचता रहा कि बाबा से अपनी सारी तकलीफ बताऊंगा। चेहरा सूजा हुआ था, बोलने में दिक्कत थी, लेकिन जैसे ही उनके सामने पहुंचा, उनका स्नेह देखकर सब शब्द गायब हो गए। मैं कुछ बोल ही नहीं पाया।

बाबा ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरा और ढेर सारा मखाना-नारियल का प्रसाद दिया। इतना प्रसाद कि दोनों हाथ भर गए। मैं नीचे उतरा, गाड़ी में बैठा और मन ही मन सोचने लगा – जिस काम से आया था, वह तकलीफ तो बताई ही नहीं। मैंने मां से कहा, “वापस चलिए, मैंने कुछ बताया ही नहीं।” मां ने मुस्कुराकर कहा, “बेटा, देवराहा बाबा से कुछ छिपा नहीं है।

उन्होंने तुम्हारे चेहरे से सब पढ़ लिया। बस प्रसाद खाओ और घर चलो।”घर लौटे तो दो दिन के अंदर चमत्कार हो गया। चेहरे की सूजन एकदम से गायब। दर्द खत्म। बोलने-खाने में कोई दिक्कत नहीं। परिजन फिर डॉक्टर के पास गए। ऑपरेशन से पहले प्रोटोकॉल के तहत नया एक्स-रे कराया गया। रिपोर्ट आई तो डॉक्टर दंग रह गए। जहां पहले जबड़े में गहरी क्रैक लाइन साफ दिख रही थी, वहां अब कुछ था ही नहीं। हड्डी पूरी तरह जुड़ चुकी थी, जैसे कभी टूटी ही न हो।

डॉक्टर बार-बार रिपोर्ट देखते रहे और पूछते रहे, “ये वही मरीज है न?” राजा भैया मुस्कुराते हुए कहते हैं, “आज भी मेरे पास दोनों एक्स-रे रिपोर्ट सुरक्षित हैं। पहली रिपोर्ट में क्रैक साफ दिखता है, दूसरी में कुछ नहीं। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। मेरे सरकार का आशीर्वाद आजीवन मेरे साथ रहा।

”देवराहा बाबा कौन थे?

देवराहा बाबा 20 वीं सदी के उन दुर्लभ संतों में से एक थे जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 500 साल से ज्यादा जीवन जिया। उनका जन्म कब हुआ, इसकी कोई आधिकारिक तारीख नहीं, लेकिन माना जाता है कि वे 18 वीं सदी के अंत या 19 वीं सदी की शुरुआत में पैदा हुए थे। वे यमुना किनारे डेहरी गांव (वृंदावन के पास) में रहा करते थे और ज्यादातर समय ऊंचे बांस के मचान पर ध्यानमग्न रहते थे।

पानी की सतह पर भी बैठे दिखते थे, इसलिए लोग उन्हें जल-सिद्ध महात्मा कहते थे।

इंदिरा गांधी उनकी परम भक्त थीं। आपातकाल के दौरान भी इंदिरा जी कई बार गुप्त रूप से उनसे मिलने पहुंची थीं। राजीव गांधी भी नियमित दर्शन करते थे। १९७७ में कांग्रेस के दो फाड़ होने के बाद जब नई कांग्रेस को नया चुनाव चिह्न चाहिए था, तब देवराहा बाबा ने ही सुझाया था कि “हाथ का पंजा” रखो।

उस समय बाबा ने इंदिरा गांधी से कहा था, “हाथ का पंजा रखो, जनता तुम्हारा हाथ थामेगी।” और हुआ भी यही। 1980 में कांग्रेस की भारी जीत हुई।19 जून 1990 को देवराहा बाबा ने समाधि ले ली।

उस समय उनकी उम्र 250 से 500 साल के बीच मानी जाती थी। लाखों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़े थे। आज भी उनके अनुयायी देश-विदेश में फैले हैं और देवराहा बाबा की लीला-कथाएं चमत्कार की तरह सुनाई जाती हैं।राजा भैया की यह कहानी भी उन्हीं चमत्कारों की एक कड़ी है।

एक किशोर जिसका जबड़ा पूरी तरह टूट चुका था, बिना किसी सर्जरी, बिना किसी दवा के मात्र दो दिन में ठीक हो गया। सिर्फ एक संत के स्पर्श और आशीर्वाद से। राजा भैया कहते हैं, “मेरे जीवन में जितनी भी उपलब्धियां हैं, जितनी भी चुनौतियां पार कीं, उसके पीछे सरकार का हाथ रहा है।

”यह कहानी सिर्फ एक नेता की नहीं, बल्कि उस श्रद्धा की है जो आज भी लाखों लोगों के दिलों में जिंदा है। देवराहा बाबा भले ही देह त्याग चुके हैं, लेकिन उनकी कृपा आज भी अपने भक्तों पर बरस रही है – राजा भैया इसका जीता-जागता प्रमाण हैं।

Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।