69000 शिक्षक भर्ती: आरक्षण व्यवस्था में सामान्य वर्ग को बड़ा नुकसान, 50% की जगह मिलीं केवल 29% सीटें
लखनऊ, 15 दिसंबर 2025: इलाहाबाद हाईकोर्ट के 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में हालिया आदेशों के बाद आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। सरकार दावा कर रही है कि आरक्षण नियमों का पालन हुआ और आरक्षित वर्ग को अतिरिक्त लाभ मिला, लेकिन आंकड़ों से साफ है कि इस प्रक्रिया में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को भारी नुकसान हुआ।
जहां सामान्य वर्ग को 50% सीटें (अनारक्षित श्रेणी) मिलनी चाहिए थीं, वहीं वास्तव में उन्हें कुल भर्ती का केवल 29.42% ही मिला। इससे सामान्य वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों के 14,199 सीटों का नुकसान हुआ है।
सरकार के जारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल 69,000 पदों में अनारक्षित श्रेणी के 34,000 से अधिक पद थे, जो सभी वर्गों के लिए खुले थे। लेकिन इनमें से सामान्य वर्ग के केवल 20,301 अभ्यर्थी ही चुने गए, जबकि शेष 14,288 पद आरक्षित वर्ग (ओबीसी: 12,630, एससी: 1,637, एसटी: 21) के अभ्यर्थियों ने अपनी मेरिट से हासिल कर लिए।
यदि ये पद सामान्य वर्ग को मिलते, तो उनकी कुल हिस्सेदारी 50% (34,500 सीटें) होती, लेकिन अब यह घटकर 20,301 (29.42%) रह गई।सामान्य वर्ग को हुआ नुकसान: आंकड़ों में समझें
- कुल पद: 69,000
- अनारक्षित श्रेणी (50%): लगभग 34,500 पद (सभी वर्गों के लिए खुले)
- सामान्य वर्ग को मिले पद: केवल 20,301 (अनारक्षित में)
- नुकसान की सीटें: 34,500 – 20,301 = 14,199
- प्रतिशत में नुकसान: 50% की जगह 29.42%, यानी 20.58% की कमी
- कारण: आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों ने अनारक्षित सीटों पर कब्जा किया, जो नियमों के अनुसार Allowed है, लेकिन इससे सामान्य वर्ग के कम मेरिट वाले लेकिन योग्य अभ्यर्थी बाहर हो गए।
वहीं, आरक्षित वर्ग को उनका कोटा तो मिला ही, साथ ही अनारक्षित में अतिरिक्त सीटें भी:
- ओबीसी: आरक्षित 18,598 + अनारक्षित 12,630 = कुल 31,228 (लगभग 45.26%)
- एससी: आरक्षित 14,000+ + एसटी के 1,100+ पद + अनारक्षित 1,637 = कुल 17,000+ (लगभग 24.64%)
- एसटी: अनारक्षित में केवल 21, जबकि उनके कोटे को एससी से भरा गया।
सरकार का कहना है कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी शासन (2012-2017) में आरक्षण में गड़बड़ी हुई, जहां ओबीसी को केवल 26.38% मिला। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार में ओबीसी की हिस्सेदारी 38.41% तक बढ़ी।
लोक सेवा आयोग की 46,675 भर्तियों में ओबीसी: 17,929 (38.41%), एससी-एसटी मिलाकर 60% से अधिक।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 42,409 भर्तियों में ओबीसी: 19,986, एससी: 8,929, एसटी: 741,
जबकि सामान्य: 9,992 और ईडब्ल्यूएस: 2,761।हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अनारक्षित श्रेणी को ‘ओपन मेरिट’ बनाने से सामान्य वर्ग को वास्तविक नुकसान होता है, क्योंकि आरक्षित अभ्यर्थी दोहरी लाभ लेते हैं।
सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी केवल अनारक्षित पर ही निर्भर हैं, जबकि आरक्षित वर्ग कोटा और मेरिट दोनों से फायदा मिलता है। इस भर्ती में सामान्य वर्ग को 14,199 सीटों का सीधा नुकसान उठाना पड़ा, जो आरक्षण नीति की एक बड़ी खामी को उजागर करता है।
सामान्य वर्गने इस पर सरकार को घेरा है और मांग की है कि सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा के लिए नीति में बदलाव किया जाए। सरकार ने कहा कि सब कुछ नियमों के अनुसार है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी में स्पष्ट कमी आई है।

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

