अमेरिकी एजेंसियों के पास ‘काली तस्वीरें’: सुब्रमण्यम स्वामी के विवादास्पद आरोपों ने हिला दिया राजनीतिक गलियारा

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नई दिल्ली, 1 दिसंबर 2025 (विशेष संवाददाता): भारतीय राजनीति में एक ऐसा भूचाल आ गया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पूर्व भाजपा सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे नाम लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। स्वामी का दावा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास प्रधानमंत्री की निजी जिंदगी से जुड़े ऐसे वीडियो और फोटो हैं, जो भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए घातक साबित हो सकते हैं। यह आरोप इतना संवेदनशील है कि स्वामी का ट्वीट कुछ ही मिनटों में डिलीट कर दिया गया, लेकिन तब तक लाखों लोगों ने इसे देख लिया और स्क्रीनशॉट्स वायरल हो चुके हैं।

विपक्षी नेता ए.के. स्टालिन ने इसे ‘फुसफुसाहट’ का रूप देते हुए सवाल उठाए हैं—कैसे? क्यों? किसका? यह मामला न केवल प्रधानमंत्री की छवि को चुनौती दे रहा है, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों पर भी सवालिया निशान लगा रहा है। क्या यह ब्लैकमेल का खेल है? या राजनीतिक साजिश? आइए, इस सस्पेंस से भरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।सुबह के करीब 10 बजे का वक्त था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर सुब्रमण्यम स्वामी का अकाउंट अचानक सुर्खियों में आ गया। 82 वर्षीय स्वामी, जो भाजपा के दिग्गज नेता रह चुके हैं और अक्सर विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं, ने एक ट्वीट में लिखा: “मोदी खुद को ब्रह्मचारी बताते हैं, लेकिन असल में उन्होंने महिलाओं से अपनी मर्जी या अनिच्छा से संबंध बनाए।

अमेरिकी एजेंसियों के पास ब्लैकमेल करने के लिए तस्वीरें और वीडियो हैं। यह भारत के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।” ट्वीट में केंद्रीय मंत्री हार्दिक पुरी का नाम भी लिया गया, जिन्हें ‘यौन खुलासों’ से जोड़ा गया। स्वामी ने दावा किया कि ये सामग्री प्रधानमंत्री को विदेशी दबाव में झुकने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं, जिससे भारत की विदेश नीति प्रभावित हो रही है।ट्वीट की सामग्री इतनी विस्फोटक थी कि यह प्रकाशित होते ही वायरल हो गई। पहले 10 मिनटों में ही 7.7 लाख से अधिक व्यूज हो गए। हजारों यूजर्स ने रीट्वीट, लाइक और कमेंट्स किए। लेकिन जैसे ही यह भाजपा मुख्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के रडार पर आया, ट्वीट डिलीट हो गया। स्वामी के अकाउंट से कोई सफाई नहीं आई। न ही भाजपा ने आधिकारिक बयान जारी किया। लेकिन इंटरनेट की दुनिया में कुछ भी मिटता नहीं। स्क्रीनशॉट्स और वीडियो रिकॉर्डिंग्स सोशल मीडिया पर फैलने लगे। विपक्षी नेता ए.के. स्टालिन, जो स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं, ने इसे पकड़ लिया। उनके अकाउंट

@iamAKstalin से एक थ्रेड पोस्ट हुआ: “सुबह से एक ही फुसफुसाहट—’अमेरिकी एजेंसियों के पास कुछ वीडियो/फोटो हैं…’ कैसे? क्यों? सस्पेंस अभी खुलना बाकी है। भारत और प्रधानमंत्री के लिए घातक खबर है।” स्टालिन ने स्वामी के डिलीटेड ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया और सवाल उठाया कि अंधभक्त क्यों गालियां दे रहे हैं, स्वामी से क्यों नहीं पूछते?यह घटना अचानक नहीं घटी। पृष्ठभूमि में कई परतें हैं। स्वामी और मोदी के बीच संबंध हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं।

2014 में मोदी सरकार बनने के बाद स्वामी ने कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दिए—राफेल डील से लेकर अर्थव्यवस्था तक। लेकिन यह पहली बार है जब उन्होंने व्यक्तिगत हमला किया। स्टालिन के थ्रेड में उल्लेख है कि स्वामी ने हार्दिक पुरी को ‘यौन खुलासों’ से जोड़ा। पुरी, जो केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हैं, पहले राजनयिक रहे और अमेरिका में उनका लंबा समय बीता। क्या स्वामी का इशारा जेफरी एपस्टीन कांड की ओर है? एपस्टीन, अमेरिकी फाइनेंशियर और सेक्स ट्रैफिकिंग का आरोपी, की फाइलों में कई भारतीय नाम आए थे। हाल ही में एलन मस्क ने ट्वीट किया था कि एपस्टीन फाइलें कभी पूरी रिलीज नहीं होंगी क्योंकि उनमें ट्रंप जैसे बड़े नाम हैं। स्वामी के आरोपों से सवाल उठता है—क्या पुरी के अमेरिकी कनेक्शन से जुड़ी कोई सामग्री मोदी तक पहुंच गई? या यह महज राजनीतिक बदला है?

विपक्ष ने इसे मौका समझा। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी: “स्वामी जी भाजपा के ही हैं। अगर उनके पास सबूत हैं, तो जांच होनी चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।” समाजवादी पार्टी के के समर्थकों ने कहा: “सत्ता के गलियारों में फुसफुसाहटें अब चीख बन रही हैं।

जनता को सच जानने का हक है।” दक्षिण भारत से ए.के. स्टालिन ने इसे और गहरा किया। उनके थ्रेड में एक फोटो भी शेयर की गई—प्रधानमंत्री मोदी और अभिनेत्री अवनी मोदी की, जो मधुर भंडारकर की फिल्म से जुड़ी हैं। स्टालिन ने लिखा: “नोट: यह फोटो पीएम मोदी और अवनी मोदी की है। क्या यही वो तस्वीरें हैं जिनका जिक्र हो रहा है?” यह फोटो पुरानी लगती है, लेकिन संदर्भ में इसे जोड़कर सनसनी फैला दी।

द्रमुक नेता एम.के. स्टालिन (जिनका नाम समान होने से कन्फ्यूजन हो रहा) ने चुप्पी साधी, लेकिन उनके के समर्थकों ने सवाल उठाया: “क्या विदेशी ताकतें भारत को कमजोर कर रही हैं?”सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय में आपात बैठक हुई। विदेश मंत्रालय ने कहा: “यह अफवाहें हैं। भारत-अमेरिका संबंध मजबूत हैं।” लेकिन सवाल बाकी हैं। अमेरिकी एजेंसियां—सीआईए, एफबीआई या एनएसए—कैसे ऐसी सामग्री हासिल कर सकती हैं? क्या यह 2014 के गुजरात दंगों के समय की जासूसी से जुड़ा? या हाल के अमेरिका दौरे के दौरान? याद कीजिए, 2023 में मोदी का अमेरिकी दौरा—व्हाइट हाउस में बाइडेन के साथ गर्मजोशी। लेकिन उसके बाद यूक्रेन संकट, रूस तेल खरीद और क्वाड गठबंधन पर तनाव बढ़ा।

क्या अमेरिका भारत को रूस से दूर करने के लिए ब्लैकमेल का सहारा ले रहा? विशेषज्ञों का कहना है कि खुफिया एजेंसियां हमेशा नेताओं की कमजोरियां ढूंढती हैं। विकीलीक्स ने 2010 में ही भारतीय राजनेताओं पर अमेरिकी जासूसी के खुलासे किए थे।ए.के. स्टालिन का थ्रेड वायरल हो चुका। उनके 42 हजार फॉलोअर्स में से हजारों ने शेयर किया। स्टालिन, जो ‘फियरलेस वॉयस ऑफ द पीपल’ के नाम से जाने जाते हैं, ने लिखा: “जो बातें बंद कमरों में थीं, अब सार्वजनिक सवाल बन रही हैं।

भारत और सरकार के लिए गंभीर मामला।” उनके थ्रेड में स्वामी के पुराने ट्वीट्स का जिक्र भी है, जहां उन्होंने मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए। स्टालिन ने एक फोटो शेयर की—स्वामी का डिलीटेड ट्वीट का स्क्रीनशॉट। कमेंट्स में अराजकता मची—कुछ यूजर्स स्वामी को ‘ट्रोल’ बता रहे, तो कुछ ‘सच्चाई का आईना’। एक यूजर ने लिखा: “अगर सच है, तो राष्ट्रपति बनने लायक नहीं।”

दूसरा बोला: “ओपोजिशन की साजिश।”यह राजनीतिक दलों के बीच जंग को नया मोड़ दे रहा। भाजपा समर्थक स्वामी को ‘निराश व्यक्ति’ बता रहे, जो चुनावी हार से तिलमिला रहा। विपक्ष इसे ‘मोदी मिथक टूटने’ का मौका मान रहा। लेकिन बड़ा सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा का है। अगर अमेरिकी एजेंसियों के पास ऐसी सामग्री है, तो क्या भारत की नीतियां प्रभावित हो रही? हाल ही में भारत का रूस से तेल आयात बढ़ा, जिस पर अमेरिका ने चेतावनी दी। क्या यह ब्लैकमेल का नतीजा?

इंटेलिजेंस विशेषज्ञ रवि शंकर प्रसाद कहते हैं: “यह गंभीर है। संसदीय समिति जांच करे।” पूर्व डिप्लोमैट एम.के. भद्रकुमार ने कहा: “अमेरिका हमेशा सहयोगी देशों पर दबाव बनाता है। लेकिन सबूत के बिना यह महज अफवाह।”सोशल मीडिया पर बहस तेज। #SwamyExposesModi ट्रेंड कर रहा।

एक्स पर 50 हजार पोस्ट्स। कुछ यूजर्स पुरानी फोटोज शेयर कर रहे—मोदी के विदेशी दौरों की। एक वीडियो वायरल—मोदी का रूस में अधिकारी को फॉलो करने का। लेकिन ज्यादातर यूजर्स सतर्क। एक पोस्ट: “अगर सच, तो खतरा। अगर झूठ, तो देशद्रोह।” स्टालिन ने थ्रेड में चेतावनी दी: “सस्पेंस खुलना बाकी। लेकिन चुप्पी ही अपराध है।”

अब आंखें संसद पर। विंटर सेशन शुरू होने वाला। क्या विपक्ष इस मुद्दे को उठाएगा? क्या स्वामी सफाई देंगे? या सरकार जांच कराएगी? यह न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि राष्ट्रीय। भारत, जो वैश्विक पटल पर मजबूत दिख रहा, अंदर से कमजोर तो नहीं? ए.के. स्टालिन की ‘फुसफुसाहट’ अब चीख बन चुकी। सत्य का इंतजार।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आधारित है। कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं। जांच जारी।

रिलाएबल मीडिया भारत के एडिटर इन चीफ राकेश पांडेय ने कहा के ये कोरी बकवास और लोगो का ध्यान खींचने की सुब्रमण्यम स्वामी की कोशिश ही प्रतीत हो रही है।

RMB News Desk

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