प्रलय मिसाइल-तकनीकी विशेषताओं से लैस भारत की रक्षा ताकत – Pralaya Missile

Please Share

Pralaya Missile प्रलय मिसाइल, जो डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई है, भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का एक प्रमुख प्रतीक है। यह कम दूरी की क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जो दुश्मन के ठिकानों को सटीकता से नष्ट करने में सक्षम बनाती है।​

प्रलय मिसाइल की विशेषताएं

प्रलय मिसाइल की रेंज 150 से 500 किलोमीटर तक है, और यह 700 से 1000 किलोग्राम तक का विस्फोटक पेलोड ले जा सकती है। इसकी उड़ान पथ क्वासी-बैलिस्टिक होता है, जो उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता प्रदान करता है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है। मिसाइल में अत्याधुनिक नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम लगा है, जिसमें स्वदेशी जीआईएस तकनीक का उपयोग किया गया है।​

हालिया परीक्षण और सफलताएं

31 दिसंबर 2025 को ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से प्रलय मिसाइल का सल्वो लॉन्च यानी दो लगातार परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया, जो एक घंटे के अंतराल में संपन्न हुआ। इससे पहले जुलाई 2025 में भी दो सफल परीक्षण हुए थे, जो इसकी सटीकता और विश्वसनीयता को सिद्ध करते हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामत ने इन परीक्षणों पर टीम को बधाई दी।​

तकनीकी श्रेष्ठता

यह मिसाइल मोबाइल लॉन्चरों से दागी जाती है, जो ‘शूट एंड स्कूट’ रणनीति अपनाते हैं, यानी दागने के बाद तुरंत स्थिति बदल लेते हैं। इसका वजन लगभग 5 टन है और यह हाइपरसोनिक गति (लगभग 7500 किमी/घंटा) प्राप्त कर सकती है। रडार-रोधी क्षमताओं से लैस यह मिसाइल युद्ध के प्रारंभिक चरण में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर प्रहार के लिए डिजाइन की गई है।

सामरिक महत्व

प्रलय मिसाइल भारत को पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के खिलाफ मजबूत सामरिक बढ़त प्रदान करती है, क्योंकि यह उनकी मिसाइलों जैसे डोंगफेंग-12 को चुनौती दे सकती है। यह पूर्णतः स्वदेशी है, जो विदेशी निर्भरता कम करती है और निर्यात की संभावना भी खोलती है। भविष्य में इसकी रेंज बढ़ाने और एयर लॉन्च वर्जन पर काम चल रहा है, जो भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

भारत की रक्षा क्रांति

डीआरडीओ की यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का हिस्सा है, जो विदेशी जीआईएस सॉफ्टवेयर पर निर्भरता समाप्त करती है। प्रलय जैसी मिसाइलें अमेरिका और रूस के बाद भारत को इस तकनीक में तीसरा प्रमुख देश बनाती हैं। इससे सीमा पर तनावपूर्ण स्थितियों में भारत की प्रतिरक्षा क्षमता कई गुना मजबूत हो गई है।

प्रलय का तकनीकी परिचय

डीआरडीओ द्वारा विकसित प्रलय मिसाइल एक स्वदेशी सतह-से-सतह क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 150 से 500 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने में सक्षम है। इसका वजन लगभग 5 टन है और यह 700-1000 किलोग्राम तक का पारंपरिक या न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकती है। क्वासी-बैलिस्टिक उड़ान पथ इसे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से श्रेष्ठ बनाता है, क्योंकि यह उड़ान के दौरान ऊंचाई कम कर दिशा बदल सकती है।​

उन्नत गाइडेंस सिस्टम

प्रलय में स्वदेशी रिंग लेजर गायरो (आरएलजी) आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस) और जीपीएस/जीआईएम सहायता प्राप्त नेविगेशन का संयोजन है, जो 10 मीटर से कम की सटीकता प्रदान करता है। यह डिप्रेशन मैन्यूवरिंग और मैन्यूवरेबल री-एंट्री व्हीकल (आरवी) से लैस है, जो एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देती है। रडार-रोधी कोटिंग और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ईसीएम) इसे दुश्मन रडारों से बचाते हैं।​

प्रणोदन और गति क्षमता

दो चरणीय ठोस ईंधन रॉकेट मोटर से प्रेरित यह मिसाइल अधिकतम मच 5-7 (लगभग 7500 किमी/घंटा) की हाइपरसोनिक गति प्राप्त करती है। पहला चरण बूस्टर लॉफ्ट चरण के बाद अलग हो जाता है, जबकि दूसरा चरण टर्मिनल फेज में सटीक मार्गदर्शन करता है। मोबाइल ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर (टीईएल) से ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता इसे तैनाती के बाद तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सक्षम बनाती है।

हालिया परीक्षण उपलब्धियां

31 दिसंबर 2025 को ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से सल्वो लॉन्च यानी दो प्रलय मिसाइलों का एक घंटे के अंतराल में सफल परीक्षण किया गया, जो इसकी त्वरित पुनः लोडिंग और विश्वसनीयता दर्शाता है। परीक्षणों में 400-500 किमी दूर लक्ष्यों को सटीक भेदा गया, जो इसकी ऑपरेशनल रेडीनेस सिद्ध करता है। इससे पूर्व जुलाई 2025 के परीक्षणों ने भी समान सफलता दिखाई।​

सामरिक एवं रणनीतिक लाभ

प्रलय पाकिस्तान की फतह-2 और चीन की डोंगफेंग-12 जैसी मिसाइलों का प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धी है, जो सीमा युद्धों में एयरफील्ड्स, कमांड सेंटर्स और लॉजिस्टिक्स को नष्ट करने के लिए आदर्श है। पूर्णतः स्वदेशी होने से यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूत करता है और निर्यात संभावनाएं खोलता है। भविष्य में एक्सटेंडेड रेंज वर्जन और एयर-लॉन्च वैरिएंट पर विकास जारी है।​

DefenceDelhiWorld

Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।