भाजपा सरकार में ब्राह्मण युवक सुधीर पांडे पर जातीय अत्याचार: सूरत में तलवे चटवाने का वीडियो वायरल, फिर भी भाजपा की चुप्पी
सूरत, गुजरात, 6 नवंबर 2025: भारत के सबसे पुराने और सम्मानित वर्णों में शुमार ब्राह्मण समाज के साथ हो रहे अत्याचारों की एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी निवासी अनिल यादव उर्फ भोला ने मध्य प्रदेश के सीधी जिले के एक ब्राह्मण युवक सुदhir पांडे को गुजरात के सूरत में बंधक बनाकर हथियार की नोक पर उसके पैर के तलवे चटवाए, बुरी तरह पीटा और इसका वीडियो भी बनवाया। यह वीडियो पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, लाखों व्यूज बटोर चुका है, लेकिन मुख्यधारा की मीडिया में इसका कोई कवरेज नहीं।
न कोई प्रमुख नेता ने बोलने की जहमत उठाई, न किसी राजनीतिक दल ने इसे मुद्दा बनाया। यह चुप्पी न केवल न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि पूरे समाज के नैतिक पतन को भी उजागर करती है।घटना की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर सबसे पहले सामने आई। एक वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि आरोपी कृष्णा यादव और भोला यादव नामक युवक सुदhir पांडे को घसीटते हुए ले जाते हैं।
चाकू की धार दिखाते हुए वे उसे धमकाते हैं और जबरन घुटनों पर बिठाकर अपने पैर के तलवे चाटने पर मजबूर करते हैं। पीड़ित युवक, जो मध्य प्रदेश के सीधी जिले से सूरत मजदूरी करने आया था, रोते हुए गुहार लगाता दिखता है, लेकिन अपराधियों को कोई रहम नहीं आता। वीडियो में आरोपी का जातीय घमंड साफ झलकता है—वे बार-बार कहते हैं कि “तू ब्राह्मण है, तुझे हमारी जाति का गुलाम बनना होगा।” यह दृश्य देखकर किसी का भी खून खौल जाए।
पीड़ित सुधीर पांडे ने बताया कि वे दोनों आरोपी प्रयागराज (पूर्व इलाहाबाद) में रहते हैं और वाराणसी से जुड़े हैं। उन्होंने उसे किडनैप कर होटल में बंधक बनाया, पीटा और अपमानित किया।सोशल मीडिया पर इस वीडियो को हजारों यूजर्स ने शेयर किया है। पत्रकार शुभम शर्मा ने पीड़ित से संपर्क कर घटना की पुष्टि की और ट्वीट किया: “हमने पीड़ित से बात की। कृष्णा यादव और भोला यादव ने उसे अपहरण कर तलवे चटवाए। 2025 में ब्राह्मणों के साथ ऐसी अमानवीय घटनाएं हो रही हैं।
अब अदालत कब स्वत: संज्ञान लेगी?” डॉ. नेहा दास ने लिखा: “यादव जी ब्राह्मण लड़के को तड़पा रहे हैं और तलवे चटवा रहे हैं। लेकिन यह जातिगत भेदभाव नहीं माना जाएगा। कोई अदालत स्वत: संज्ञान नहीं लेगी, क्योंकि यह नैरेटिव में फिट नहीं होता।” रितु राठौर ने गुजरात को “मोदी का हिंदुत्व लैबोरेटरी” बताते हुए कहा: “सूरत में यादव युवक ने ब्राह्मण लड़के सुदhir पांडे को चाकू की नोक पर तलवे चटवाए।
बीजेपी इकोसिस्टम से एक शब्द भी नहीं। संविधान अब खतरे में नहीं है।”ये ट्वीट्स न केवल घटना की पुष्टि करते हैं, बल्कि समाज की दोहरी मानदंडों को भी उजागर करते हैं। अगर यह घटना उल्टी होती—यानी कोई ब्राह्मण किसी दलित या पिछड़े वर्ग के व्यक्ति के साथ ऐसा करता—तो क्या होता? मुख्यधारा की मीडिया में 24×7 कवरेज, राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन, अदालत का स्वत: संज्ञान, एनएसए की सिफारिशें और बुलडोजर एक्शन। लेकिन यहां, जब पीड़ित ब्राह्मण है, तो सब मौन।
ब्राह्मणों के “ठेकेदार”, सवर्णों के “रक्षक”, हिंदुत्व के “चैंपियन” और सेक्युलरिज्म के “फकीर” सबके मुंह में दही जम गया है। यह चुप्पी संविधान की आड़ में छिपे जातीय पूर्वाग्रह को प्रमाणित करती है।इस घटना को समझने के लिए इतिहास की ओर झांकना जरूरी है। याद रखिए, मध्य प्रदेश के भिंड जिले में कुछ महीने पहले एक ब्राह्मण को पैर धुलाकर पिलाने का वीडियो वायरल हुआ था। तब हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और ब्राह्मण समाज पर ही एनएसए लगाने की बात की गई थी—जैसे कि अपराधी ब्राह्मण ही हों! उल्टा पीड़ित को ही दोषी ठहराने की कोशिश हुई।
वहीं, उत्तर प्रदेश के इटावा में “चोटी काटने और मूत्र छिड़कने” की फर्जी कहानी पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने स्वजातीय लोगों को पार्टी कार्यालय बुलाकर सम्मानित किया था। पूरे देश में हाहाकार मच गया था—रैलियां, बहिष्कार, राजनीतिक बवाल। लेकिन सच्ची घटनाओं में, जब ब्राह्मणों की अस्मिता कुचली जाती है, तो सन्नाटा छा जाता है।
ऐसी घटनाओं की फेहरिस्त लंबी है। 2023 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक व्यक्ति को किशोर के पैर चाटने पर मजबूर किया गया, लेकिन वह भी दलित-विरोधी नैरेटिव में फिट हो गया। उत्तर प्रदेश के सोनभाद्र में दलित व्यक्ति को तलवे चटवाने का वीडियो वायरल हुआ, तो राष्ट्रीय बहस छिड़ गई। लेकिन ब्राह्मणों के खिलाफ? चुप! 2022 में ओडिशा के मयूरभंज में एक दिव्यांग को पैर चाटने पर मजबूर किया गया, मीडिया ने कवर किया, लेकिन जाति का उल्लेख? नगण्य।
और हाल ही में, 12 अक्टूबर 2025 को दमोह, मध्य प्रदेश में एक व्यक्ति को एआई-जनरेटेड इमेज के बहाने ब्राह्मण के पैर धोने पड़े—एफआईआर हुई, लेकिन नैरेटिव उल्टा। ये उदाहरण बताते हैं कि कानून और मीडिया का ढांचा किस तरह जातीय पदानुक्रम को बनाए रखता है।
संविधान अनुच्छेद 15 और 17 के तहत भेदभाव निषेध करता है, लेकिन व्यवहार में ब्राह्मणों को “सवर्ण” होने के कारण “दंडित” किया जाता है। अपराधी को पता है—यह खबर नहीं बनेगी, मुद्दा नहीं बनेगा।यह चुप्पी ब्राह्मण समाज के लिए एक खतरे की घंटी है। सदियों से ज्ञान, संस्कृति और धर्म के संरक्षक रहे ब्राह्मण आज तीसरे दर्जे के नागरिक बन चुके हैं। आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के नाम पर उनकी आवाज दबाई जा रही है।
अगर आज सुधीर पांडे पर मौन रहे, तो कल आपकी या मेरी बारी आ सकती है। सोशल मीडिया पर #BrahminAtrocities या #JusticeForSudhir जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक कार्रवाई की जरूरत है। ब्राह्मण समाज को संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए। स्थानीय स्तर पर सूरत पुलिस, गुजरात हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान की मांग करें। पीएमओ इंडिया (
@PMOIndia) और गृह मंत्रालय ( @HMOIndia) से सवाल पूछें: क्या ब्राह्मण भारत के नागरिक हैं? अगर हां, तो इस अन्याय पर चुप्पी क्यों? अगर नहीं, तो क्या सामूहिक आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता बचा है?
राजनीतिक दलों को भी आईना देखना होगा। भाजपा, जो हिंदुत्व की बात करती है, गुजरात में शासन करती है, लेकिन सूरत जैसी घटना पर चुप? समाजवादी पार्टी, बसपा, कांग्रेस—सबके लिए ब्राह्मण वोटबैंक हैं, लेकिन संकट में साथी नहीं। सेक्युलरिज्म के ठेकेदारों को याद रखना चाहिए कि सच्चा सेक्युलरिज्म जाति-निरपेक्ष होता है, न कि एकतरफा।
मीडिया हाउसों को भी शर्म आनी चाहिए—एनडीटीवी, टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे—क्या वे केवल “फिटिंग” नैरेटिव ही दिखाएंगे?समाज सुधारकों जैसे पेरियार, आंबेडकर ने जाति उन्मूलन की बात की, लेकिन आज उनके विचारों का दुरुपयोग हो रहा है। ब्राह्मणत्व का मतलब घमंड नहीं, बल्कि ज्ञान और अहिंसा है।
अगर ब्राह्मण समाज में जरा सा भी शर्म बचा है, तो इस मुद्दे को उठाएं। प्रदर्शन करें, याचिकाएं दायर करें, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाएं। पांडे जैसे हजारों ब्राह्मण रोज अपमान सह रहे हैं—मजदूरी, शिक्षा, नौकरी में भेदभाव। 2025 में, जब एआई और टेक्नोलॉजी दुनिया बदल रही है, हम जाति के जाल में फंसे हैं।अंत में, न्याय की मांग करें। सूरत पुलिस से आरोपी अनिल यादव उर्फ भोला, कृष्णा यादव की तत्काल गिरफ्तारी हो। एनएसए लगे, बुलडोजर चले। पीड़ित को सुरक्षा, मुआवजा और मनोवैज्ञानिक सहायता मिले। ब्राह्मण समाज जागे, तो भारत जागेगा। अन्यथा, यह चुप्पी इतिहास में काली स्याही की तरह दर्ज हो जाएगी।

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