वाराणसी अस्सी घाट मोबाइल चोरी: मुंबई सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता गुप्ता ने खुद ट्रैक कर लुटेरों का अड्डा खोल दिया, पुलिस पहुंची तो श्रेय लेने लगी-Assi Ghat mobile theft

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Assi Ghat mobile theft वाराणसी अस्सी घाट पर मोबाइल चोरी की घटना में मुंबई की अंकिता गुप्ता ने IMEI ट्रैकिंग से लुटेरों का अड्डा ढूंढ निकाला। काशी पर्यटक सुरक्षा के दावों पर सवाल, पुलिस की सुस्ती उजागर।

वाराणसी, धर्म नगरी काशी, जहां हर घाट पर भगवान शिव की ज्योति जगमगाती है और पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है। लेकिन अस्सी घाट जैसी पवित्र जगह पर मोबाइल लुटेरों का अड्डा सक्रिय होना सदमे से कम नहीं। मुंबई से घूमने आई सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता गुप्ता ने न सिर्फ अपना 2 लाख रुपये का आईफोन खोया, बल्कि पुलिस की सुस्ती को देखकर खुद कमान संभाली। अपने तकनीकी हुनर से उन्होंने लुटेरों का ठिकाना ढूंढ निकाला और 15-20 महंगे मोबाइल फोन बरामद कराए। यह घटना काशी में पर्यटकों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रही है।

अस्सी घाट पर चोरी की वारदात: पर्यटकों पर लुटेरों का साया

सोमवार शाम को अस्सी घाट की खूबसूरती में खोईं अंकिता गुप्ता को क्या पता था कि यह शाम उनके साहस की परीक्षा बनेगी। मुंबई के घाटकोपर निवासी उमेश गुप्ता की बेटी अंकिता वाराणसी घूमने आई थीं। घाट पर हजारों पर्यटक मौजूद थे, पुलिस की सतर्कता के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन एक शातिर चोर ने उनका आईफोन छीन लिया। चोर भीड़ का फायदा उठाकर फुर्र हो गया। अंकिता ने तुरंत भेलूपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने केवल मोबाइल गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखी और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

यह घटना अकेली नहीं है। वाराणसी के घाटों पर मोबाइल चोरी की शिकायतें आम हो चुकी हैं। अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट जैसे पर्यटन स्पॉट्स पर लुटेरे सक्रिय हैं। पर्यटक दूर-दराज से आते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति ही होती दिखती है। अंकिता का केस इसकी मिसाल है।

पुलिस की सुस्ती: लोकेशन ट्रेसिंग में असमर्थता जताई

अंकिता बेहद निराश हुईं जब पुलिस ने IMEI नंबर से लोकेशन ट्रेस करने में असमर्थता जताई। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने के नाते अंकिता को तकनीक की बारीकियां पता थीं। उन्होंने खुद एक विशेष ऐप डाउनलोड किया और फोन के IMEI नंबर से ट्रैकिंग शुरू कर दी। रात के 2 बजे लोकेशन अस्सी घाट से 6 किलोमीटर दूर चांदपुर इलाके में स्थिर हो गई। अंकिता अकेले ही वहां पहुंचीं। लोकेशन एक घर के अंदर इशारा कर रही थी।

उन्होंने पुलिस को सूचना दी, लेकिन टीम ने कमरे की तलाशी नहीं ली। केवल आश्वासन देकर लौट गई। यह पुलिस की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली का स्पष्ट उदाहरण था। अंकिता ने हार नहीं मानी। भोर के 5 बजे वे दोबारा मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों से बात की तो पता चला कि मकान राजेंद्र पटेल का है और किराएदार फरार है। ताला तोड़कर अंदर झांका तो होश उड़ गए – अंकिता का आईफोन समेत 15-20 महंगे मोबाइल बिखरे पड़े थे।

अंकिता का साहस: तकनीकी कौशल से लुटेरों का पर्दाफाश

अंकिता गुप्ता का साहस काबिले-तारीफ है। मुंबई जैसे महानगर से आने वाली यह युवती अकेले रात में चोरों के अड्डे तक पहुंच गई। IMEI ट्रैकिंग ऐप ने उनका साथ दिया। यह तकनीक हर स्मार्टफोन यूजर के लिए उपलब्ध है, लेकिन ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल नहीं जानते। अंकिता ने न सिर्फ अपना फोन बरामद कराया, बल्कि अन्य चोरी के फोन भी मिले, जो घाटों पर लूटे गए थे।

सोशल मीडिया पर अंकिता की यह कहानी वायरल हो गई। लोग उनकी जिद और साहस की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “काशी में पर्यटक सुरक्षा के दावे झूठे साबित हो गए। अंकिता मैम सलाम!” यह घटना महिलाओं के सशक्तिकरण की भी मिसाल है। अंकिता ने साबित कर दिया कि बेटियां किसी से कम नहीं।

IMEI ट्रैकिंग कैसे काम करती है? सीखें खुद Assi Ghat mobile theft

IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर हर फोन का यूनिक कोड होता है। चोरी होने पर *#06# डायल कर IMEI चेक करें। Google के Find My Device या Apple’s Find My ऐप से ट्रैक करें। अंकिता ने इसी का सहारा लिया। पर्यटकों को सलाह: हमेशा IMEI नोट करें, लोकेशन ऑन रखें। काशी घाटों पर ऐसी वारदातें रोकने के लिए यह जरूरी है।

चांदपुर अड्डा: मोबाइल लुटेरों का नेटवर्क उजागर

चांदपुर इलाके का वह मकान मोबाइल लुटेरों का अड्डा साबित हुआ। कमरे में आईफोन, सैमसंग, वनप्लस जैसे ब्रांड्स के 15-20 फोन बरामद हुए। सभी महंगे मॉडल, कुल मूल्य लाखों में। किराएदार फरार है, पुलिस तलाश में जुटी है। राजेंद्र पटेल से पूछताछ हो रही है। यह गैंग अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट जैसे स्पॉट्स को टारगेट करता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चोर घाटों पर भीड़ में चोरी करते और चांदपुर में फोन जमा करते। अंकिता की खोज से यह नेटवर्क पकड़ा गया। लेकिन सवाल उठता है – पुलिस की सर्विलांस कैमरे कहां थे? घाटों पर CCTV हैं, लेकिन ट्रैकिंग क्यों नहीं हुई?

पुलिस का रवैया: श्रेय लेने पहुंची, लेकिन सुस्ती छिपाई

सूचना मिलते ही पुलिस दौड़ पड़ी। सभी फोन जब्त कर लिए। भेलूपुर थाना प्रभारी निरीक्षक ने कहा, “सूचना पर कार्रवाई की गई।” लेकिन हकीकत यह है कि अंकिता ने रात-भर जद्दोजहद की, पुलिस ने पहली बार आने पर तलाशी तक नहीं ली। अब बरामदगी का श्रेय ले रही है। यह पुलिस की सुस्ती को उजागर करता है।

वाराणसी पुलिस अक्सर पर्यटक सुरक्षा के दावे करती है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर कमियां साफ हैं। अस्सी घाट पर पेट्रोलिंग बढ़ानी होगी, CCTV एक्टिव रखने होंगे। अंकिता के केस ने सिस्टम को आईना दिखाया है।

काशी में पर्यटक सुरक्षा की कड़वी सच्चाई

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। सालाना करोड़ों विजिटर आते हैं। लेकिन चोरी, लूट की घटनाएं बढ़ रही हैं। 2025 में ही अस्सी घाट पर दर्जनों शिकायतें। प्रशासन को सख्ती बरतनी होगी।

अंकिता गुप्ता: मुंबई से काशी तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का सफर

अंकिता गुप्ता घाटकोपर, मुंबई की रहने वाली हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में पारंगत। पिता उमेश गुप्ता व्यापारी हैं। वाराणसी आकर घाटों की आध्यात्मिकता का लुत्फ ले रही थीं। चोरी के बाद उन्होंने साहस दिखाया। अब सोशल मीडिया स्टार बन गईं। इंटरव्यू में अंकिता ने कहा, “पुलिस पर भरोसा था, लेकिन खुद करना पड़ा। महिलाएं अकेले घूमें, लेकिन सतर्क रहें।”

उनकी कहानी युवाओं को प्रेरित कर रही है। तकनीक का सही इस्तेमाल कैसे होता है, यह सिखा रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल: #SaveKashiTourists ट्रेंड

ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर #अंकितागुप्ताकाशी, #अस्सीघाटचोरी ट्रेंड कर रहा। लोग पुलिस से सवाल पूछ रहे। एक पोस्ट में लिखा, “काशी में मोबाइल लुटेरे घूम रहे, पुलिस सो रही?” वायरल वीडियो में अंकिता मकान के बाहर खड़ी नजर आ रही हैं।

यह ट्रेंड काशी पर्यटक सुरक्षा पर बहस छेड़ रहा। एनजीओ और एक्टिविस्ट आगे आ रहे।

आगे क्या? पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी

पुलिस को किराएदार को जल्द गिरफ्तार करना होगा। घाटों पर स्पेशल स्क्वॉड तैनात करें। IMEI ट्रैकिंग ट्रेनिंग दें। पर्यटकों के लिए हेल्पलाइन ऐप लॉन्च करें। अंकिता जैसी घटनाएं न हों, इसके लिए सिस्टम सुधार जरूरी।

निष्कर्ष: साहस की मिसाल, सिस्टम सुधार की मांग

अंकिता गुप्ता ने काशी में मोबाइल चोरी के खिलाफ जंग जीत ली। लेकिन यह जीत व्यक्तिगत है। काशी को सुरक्षित बनाने के लिए सामूहिक प्रयास चाहिए। पर्यटक सुरक्षा के दावे अब काम करें। अंकिता को सम्मानित किया जाना चाहिए।

स्रोत: स्थानीय रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया।


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Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।