सोशल मीडिया पर फर्जी पेजों का बढ़ता खतरा: प्रतापगढ़िया पंपोष पेज के गलत पोस्ट्स पर विवाद – Controversy over Pratapgarhia Pumposh page

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Controversy over Pratapgarhia Pumposh page उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ क्षेत्र से जुड़े एक सोशल मीडिया पेज ने हाल ही में विवाद खड़ा कर दिया है। फेसबुक पर सक्रिय “प्रतापगढ़िया पंपोष” नामक पेज पर “मामा के इलाज” से जुड़ी पोस्ट्स लगातार शेयर की जा रही हैं, जिन्हें कई लोग फर्जी और भ्रामक बता रहे हैं। इस पेज पर पोस्ट किए गए दावों ने लोगों में भ्रम फैलाया है, जिसके खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है।

घटना की पृष्ठभूमि

27 दिसंबर को फेसबुक यूजर विकास शुक्ला गुरु दादीबाबा ने एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने “प्रतापगढ़िया पंपोष” पेज को फर्जी करार दिया। पोस्ट में लिखा गया था: “ये फर्जी पेज प्रतापगढ़िया पंपोष लगातार गलत गलत पोस्ट कर रहा है मामा के इलाज को लेके। आप लोग इसकी खबर को बिल्कुल ध्यान ना दे, सब फर्जी जानकारी डाल रहा है। इस पेज को आप लोग ब्लॉक करे, आज इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करूंगा।

“इस पोस्ट के साथ एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जिसमें पेज की प्रोफाइल दिखाई दे रही है। पेज पर करीब 11.4K फॉलोअर्स हैं, और यह खुद को “कॉमेडियन” बताता है। पेज का नाम “प्रतापगढ़िया पंपोष” है, और इसमें यूट्यूब लिंक भी दिया गया है। पोस्ट में दावा किया गया कि यह पेज बार-बार “मामा के इलाज” से जुड़ी गलत और फर्जी जानकारियां फैला रहा है, जिससे लोग ठगे जा सकते हैं या गुमराह हो सकते हैं।

फर्जी पेजों का बढ़ता चलन

सोशल मीडिया पर फर्जी पेजों का सिलसिला नया नहीं है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे हजारों पेज सक्रिय हैं, जो लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर पैसे ऐंठते हैं। “मामा के इलाज” जैसी पोस्ट्स अक्सर भावुकता का सहारा लेती हैं – जैसे किसी रिश्तेदार की बीमारी, महंगे इलाज की जरूरत, या दान मांगना।

ऐसे पेज पर लोग सहानुभूति में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि पूरी कहानी झूठी थी।हाल के कुछ बड़े मामलों में देखा गया है कि फर्जी पेज सरकारी पोर्टल्स की नकल करते हैं, जैसे ई-चालान, भर्ती या मेडिकल मदद के नाम पर। उदाहरण के लिए, हाल ही में 36 से ज्यादा फर्जी RTO ई-चालान साइट्स का खुलासा हुआ, जहां लोग बैंक डिटेल्स चोरी कर लेते थे।

इसी तरह, सरकारी नौकरियों के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स बनाकर आवेदकों से फीस ली जाती है।”प्रतापगढ़िया पंपोष” पेज के मामले में भी यही आशंका जताई जा रही है कि यह पेज भावनात्मक पोस्ट्स के जरिए लोगों से पैसे मांग रहा हो। पेज पर “मामा” से जुड़ी कहानी बार-बार दोहराई जा रही है, जो संदेह पैदा करती है।

स्थानीय प्रतिक्रिया और एफआईआर की तैयारी

विकास शुक्ला जैसे यूजर्स ने लोगों से अपील की है कि इस पेज को ब्लॉक करें और इसकी पोस्ट्स पर ध्यान न दें। उन्होंने यह भी कहा कि वे जल्द ही इसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराएंगे। प्रतापगढ़ में सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में पहले भी शिकायतें दर्ज हुई हैं, जहां फर्जी पेजों ने लोगों को ठगा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फर्जी पेजों के खिलाफ साइबर सेल सक्रिय है। अगर कोई व्यक्ति या पेज बार-बार भ्रामक जानकारी फैलाता है या ठगी करता है, तो आईपीसी की धारा 420 (ठगी), 465 (जालसाजी) और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

लोगों को सलाह Controversy over Pratapgarhia Pumposh page

  • सत्यापन करें: किसी भी दान या मदद की अपील पर पहले पेज की वैरिफिकेशन चेक करें। असली पेज या संस्था के पास आधिकारिक वेबसाइट, रजिस्टर्ड नंबर और पारदर्शी जानकारी होती है।
  • भावनाओं में न बहें: “मामा-भांजा” या “इलाज” जैसी पोस्ट्स पर तुरंत पैसे न भेजें। पहले स्थानीय पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
  • रिपोर्ट करें: फेसबुक पर ऐसे पेज को “फेक” रिपोर्ट करें।
  • एफआईआर दर्ज कराएं: अगर आपको ठगी हुई हो, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

सोशल मीडिया आज सूचना का बड़ा स्रोत है, लेकिन फर्जी पेजों के कारण यह खतरे का भी कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पेज के खिलाफ कार्रवाई होगी और लोग सतर्क रहेंगे।

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Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।