प्रयागराज: न्याय की आस में भटक रहा पीड़ित परिवार, अधिकारियों के आदेश भी नवाबगंज पुलिस के लिए बने ‘बेअसर’
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब नवाबगंज थाना क्षेत्र के एक पीड़ित परिवार ने पुलिस के आला अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी का आरोप लगाया। रविवार को प्रयागराज के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब स्थित नारद सभागार में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान पीड़ित हरिनंदन का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उनका परिवार पिछले तीन महीनों से दर-दर भटक रहा है, लेकिन नवाबगंज पुलिस राजनीतिक संरक्षण प्राप्त आरोपियों को बचाने में जुटी है।
क्या है पूरा मामला?
मोहम्मदपुर गांव निवासी हरिनंदन के अनुसार, घटना 21 मार्च 2026 की है। उस दिन उनके बेटे, पत्नी और बेटी पर कुछ दबंगों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों की त्वरित मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति इतनी नाजुक थी कि उसे 11 दिनों तक आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत से संघर्ष करना पड़ा।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
हरिनंदन ने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद जब वे न्याय के लिए नवाबगंज थाने पहुंचे, तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी की। कई दिनों के संघर्ष और चक्कर काटने के बाद 26 मार्च को नामजद एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन यहां से असली लड़ाई शुरू हुई।
पीड़ित का आरोप है:
- धाराओं में हेरफेर: मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद, पुलिस ने मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को बचाने का रास्ता साफ कर दिया।
- गिरफ्तारी न होना: घटना के महीनों बाद भी मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को धमकियां दे रहे हैं।
- समझौते का दबाव: पुलिस की मिलीभगत से आरोपियों के पक्ष द्वारा लगातार समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश भी ठंडे बस्ते में
न्याय न मिलने पर हरिनंदन ने उच्च अधिकारियों के दरबार में दस्तक दी। उन्होंने 15 अप्रैल 2026 को अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अजय पाल शर्मा से मुलाकात की। हरिनंदन के मुताबिक, अपर पुलिस आयुक्त ने मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितियों का संज्ञान लेते हुए नवाबगंज पुलिस को मुकदमे में उचित गंभीर धाराएं जोड़ने और पीड़ित पक्ष को धमकाने वालों के खिलाफ तत्काल विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
हालाँकि, स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर कोई असर नहीं पड़ा। जब हरिनंदन आदेश की कॉपी लेकर नवाबगंज थाना पहुंचे, तो उनकी तहरीर लेने तक से इनकार कर दिया गया। उन्होंने डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी फरियाद पहुंचाई, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा।
सुरक्षा का खतरा और भविष्य की चिंता
प्रेसवार्ता में हरिनंदन ने कहा, “जब हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसे संगीन मामले में आरोपी गिरफ्तार नहीं हो सकते, तो आम आदमी की सुरक्षा की क्या गारंटी है?” उन्होंने बताया कि आरोपी पक्ष लगातार उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाने की फिराक में है। परिवार अब दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
न्याय की गुहार
हरिनंदन ने प्रशासन से अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा है:
- वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का तत्काल पालन करते हुए मुकदमा सही धाराओं में तरमीम किया जाए।
- नामजद आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए।
- पीड़ित परिवार को जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस मामले ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर पुलिस और अपराधियों के बीच की साठगांठ की ओर इशारा किया है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाते हैं या फिर पुलिस की शिथिलता के कारण न्याय की यह फाइल फाइलों के अंबार में ही दबी रह जाएगी।

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