आयुर्वेद की पलाश क्षार विधि से बच्चेदानी के कैंसर का सफल इलाज : डॉ. संतोष दुबे ने रचा इतिहास -Successful treatment of uterine cancer
Prayagraj Successful treatment of uterine cancer आयुर्वेद की प्राचीन क्षार चिकित्सा पद्धति ने एक बार फिर आधुनिक चिकित्सा जगत को चौंकाते हुए कैंसर जैसी असाध्य बीमारी को मात देने का दावा किया है। हिंदुस्तानी अकादमी सभागार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य एवं क्षार सूत्र विशेषज्ञ डॉ. संतोष दुबे ने घोषणा की कि उन्होंने पलाश क्षार विधि से एक महिला मरीज प्रेमादेवी के बच्चेदानी (गर्भाशय) के कैंसर का पूरी तरह सफल इलाज किया है। सर्जरी के बाद आई एमआरआई रिपोर्ट में कैंसर का कोई चिह्न तक नहीं बचा है। यह आयुर्वेद के लिए ऐतिहासिक क्षण है।
अगस्त में हुई थी अनोखी सर्जरी
डॉ. संतोष दुबे ने बताया कि मरीज प्रेमादेवी को जुलाई 2025 में बच्चेदानी का कैंसर (carcinoma cervix) स्टेज 2B تشخیص हुआ था। मरीज के परिजन पहले एलोपैथी अस्पताल गए थे जहाँ कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का प्लान बना था, लेकिन भारी खर्च और साइड इफेक्ट्स के डर से उन्होंने आयुर्वेद का रुख किया। अगस्त 2025 में डॉ. दुबे ने विश्व की पहली “वैश्विक पलाश क्षार विधि” (Global Palash Kshar Technique) से ऑपरेशन किया। इस तकनीक में शुद्ध पलाश (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा) के क्षार को विशेष अनुपात में तैयार कर ट्यूमर पर सीधे लगाया जाता है। क्षार अपने छेदन, भेदन और लेखन गुणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देता है और स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं पहुँचाता। सर्जरी के सिर्फ 45 दिन बाद हुई एमआरआई और बायोप्सी रिपोर्ट पूरी तरह निगेटिव आई। मरीज आज पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रही है।
हजारों साल पुरानी सुश्रुत की विधि को मिली नई पहचान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वरिष्ठ आयुर्वेद सर्जन डॉ. अवनीश पाण्डेय ने बताया कि आचार्य सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता में 5000 वर्ष पहले ही क्षार को “अग्नि और शस्त्र से भी श्रेष्ठ” बताया है। क्षार आठ प्रकार के होते हैं, जिनमें पलाश क्षार सबसे शक्तिशाली माना गया है। पलाश में पलाशोन, ब्यूटिन, कोरिलेजिन जैसे फाइटोकेमिकल्स होते हैं जिनमें शक्तिशाली एंटी-कैंसर, एंटी-ऑक्सीडेंट और फ्री रेडिकल स्केवेंजर गुण होते हैं। आधुनिक रिसर्च में भी पलाश के एक्सट्रेक्ट ने ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और ओरल कैंसर की कोशिकाओं को 80-90% तक नष्ट करने की क्षमता दिखाई है।
“कैंसर का इलाज आयुर्वेद में संभव है”-Successful treatment of uterine cancer
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ (आयुर्वेद) डॉ. भरत नायक ने कहा, “कैंसर तब तक लाइलाज नहीं है जब तक मरीज समय रहते आयुर्वेद चिकित्सक के पास पहुँच जाए। स्टेज-1 और स्टेज-2 में आयुर्वेद से 90% से ज्यादा मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।” उन्होंने बताया कि कैंसर मरीजों में इम्यूनिटी बहुत कम हो जाती है। आयुर्वेद की इम्यूनिटी बढ़ाने वाली औषधियाँ जैसे गुदुची, अश्वगंधा, कांचनार गुग्गुल, त्रिफला और पलाश क्षार के साथ दी जाएँ तो शरीर खुद कैंसर से लड़ने लगता है।
अब तक 50 से ज्यादा कैंसर मरीजों को दी नई जिंदगी
डॉ. संतोष दुबे ने खुलासा किया कि पिछले 8 सालों में उन्होंने पलाश क्षार विधि से सर्वाइकल कैंसर, ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, टंग कैंसर और स्किन कैंसर के 50 से अधिक मरीजों का सफल इलाज किया है। इनमें कई मरीज ऐसे थे जिन्हें एम्स और टाटा मेमोरियल जैसे बड़े अस्पतालों ने जवाब दे दिया था।
एविडेंस बेस्ड रिसर्च की जरूरत
डॉ. दुबे ने सरकार और आयुष मंत्रालय से मांग की कि पलाश क्षार चिकित्सा पर बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल हों। “हमारे पास सैकड़ों केस स्टडीज और रिपोर्ट्स हैं। अगर केंद्र सरकार फंडिंग दे तो हम 1000 मरीजों पर रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल कर दुनिया को दिखा सकते हैं कि आयुर्वेद कैंसर को जड़ से खत्म कर सकता है।”
मरीज की जुबानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद मरीज प्रेमादेवी (55 वर्ष) ने आँसुओं भरी आँखों से कहा, “डॉक्टरों ने कहा था कीमो कराओ, बाल झड़ जाएँगे, उल्टी होगी, कमजोरी आएगी। मैं डर गई थी। डॉ. संतोष दुबे जी ने सिर्फ 7 दिन में ऑपरेशन कर दिया। आज मैं बिल्कुल स्वस्थ हूँ। मेरी पोती की शादी में नाचूँगी। आयुर्वेद ने मुझे नया जीवन दिया है।”
क्या है पलाश क्षार?
पलाश (टेशू/ढाक) के पेड़ की छाल, पत्तियों और फूलों से विशेष विधि द्वारा क्षार तैयार किया जाता है। यह क्षार अत्यंत शक्तिशाली होता है जो ट्यूमर कोशिकाओं को चुन-चुन कर नष्ट करता है। इसे लगाने पर कैंसर कोशिकाएँ नेक्रोसिस (मृतकोशिका) में बदल जाती हैं और शरीर से बाहर निकल जाती हैं। सबसे बड़ी बात, यह नॉर्मल सेल्स को नुकसान नहीं पहुँचाता।
विशेषज्ञों की राय
- डॉ. ओ.पी. मिश्रा (वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य): “यह आयुर्वेद के पुनर्जागरण का समय है।”
- डॉ. अरविंद मिश्रा: “पलाश क्षार को NCCIH (अमेरिका) और WHO भी अब गंभीरता से ले रहा है।”
- डॉ. मोहन यादव: “आयुर्वेद में कैंसर का इलाज सिर्फ संभव ही नहीं, सस्ता और साइड इफेक्ट फ्री भी है।”
डॉ. संतोष दुबे ने कहा, “यह सिर्फ एक मरीज की जीत नहीं, 5000 साल पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति की जीत है। हमें गर्व है कि हम सुश्रुत और चरक की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।”यह मामला न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए उम्मीद की नई किरण है कि कैंसर जैसी भयावह बीमारी का इलाज भारतीय आयुर्वेद में मौजूद है। बस जरूरत है इसे सही समय पर अपनाने की और सरकार से समर्थन की।

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