उत्तर प्रदेश में बड़ी कार्रवाइयाँ, पूर्व आईपीएस की गिरफ्तारी

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लखनऊ/गाजीपुर/देवरिया, 13 दिसंबर 2025:

उत्तर प्रदेश में अपराध और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लगातार सक्रिय हैं। हाल के दिनों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों में कार्रवाई हुई है, जिसमें पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी, दिवंगत माफिया मुक्तार अंसारी के सहयोगियों की संपत्तियों की कुर्की और विभिन्न हत्याओं के मामले शामिल हैं। ये घटनाएँ राज्य में अपराध पर लगाम कसने की सरकार की मुहिम को दर्शाती हैं, लेकिन साथ ही पुराने मामलों के फिर से खुलने और राजनीतिक विवादों को भी उजागर करती हैं।

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की नाटकीय गिरफ्तारी: 26 साल पुराना भूमि धोखाधड़ी मामला

उत्तर प्रदेश की पुलिस ने 10 दिसंबर को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार किया। ठाकुर, जो 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं और अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद ‘आजाद अधिकार सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, को लखनऊ से दिल्ली जा रही ट्रेन से शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर तड़के करीब 2 बजे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने सर्विलांस के आधार पर उनकी लोकेशन ट्रेस की और सादे कपड़ों मेंट्रेन में चढ़कर उन्हें हिरासत में लिया।

यह गिरफ्तारी 1999 के एक पुराने भूमि धोखाधड़ी मामले से जुड़ी है। आरोप है कि ठाकुर ने देवरिया में एसपी रहते हुए अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर औद्योगिक प्लॉट अवैध तरीके से हासिल किया। नूतन ठाकुर ने कथित तौर पर फर्जी नाम ‘नूतन देवी’ और पति का नाम ‘अभिजात ठाकुर’ तथा बिहार के सीतामढ़ी का फर्जी पता इस्तेमाल कर आवेदन किया।

फर्जी दस्तावेजों जैसे एफिडेविट, ट्रेजरी चालान और ट्रांसफर डीड बनाकर प्लॉट लिया गया, जबकि ठाकुर ने अपनी पद का दुरुपयोग कर इस धोखाधड़ी को संरक्षण दिया। बाद में प्लॉट को असली नाम से बेच दिया गया, जिससे सरकारी विभागों और बैंकों को वर्षों तक धोखे में रखा गया।मामला लखनऊ के तालकटोरा थाने में सितंबर 2025 में संजय शर्मा की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आईपीसी की धाराओं 419 (प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (दस्तावेज जालसाजी) और 120बी (साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज कर एसआईटी गठित की गई।

जांच में देवरिया और बिहार से दस्तावेज जुटाए गए और गवाहों के बयान लिए गए। ठाकुर को देवरिया कोर्ट में पेश किया गया, जहां सीजेएम मंजू कुमारी ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट में ठाकुर ने अपनी जान को खतरा बताया और रोते हुए कहा कि सत्ता के लोग उनकी हत्या की साजिश रच सकते हैं, क्योंकि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।

ठाकुर का करियर विवादों से भरा रहा है। वे मुलायम सिंह यादव से टकराव के बाद चर्चा में आए थे और योगी सरकार में भी कई बार टकराव हुआ। 2021 में वे योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद गिरफ्तार हुए थे। उनकी पत्नी नूतन ठाकुर ने गिरफ्तारी को ‘साजिश’ बताया और कहा कि यह 26 साल पुराना सिविल विवाद है, जिसे आपराधिक रंग दिया जा रहा है। विपक्षी दलों ने इसे ‘बदले की कार्रवाई’ करार दिया है। यह मामला राज्य की राजनीति में गर마 गया है और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है।

ईडी की कार्रवाई: मुक्तार अंसारी के सहयोगी शादाब अहमद की 2.03 करोड़ की संपत्ति कुर्क

दिवंगत माफिया से राजनेता बने मुक्तार अंसारी के नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा कसता जा रहा है। 10 दिसंबर को ईडी ने पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत गाजीपुर स्थित विकास कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े मामले में 6 अचल संपत्तियों को कुर्क किया, जिनकी कीमत 2.03 करोड़ रुपये है। ये संपत्तियां अंसारी के करीबी सहयोगी शादाब अहमद और उनकी पत्नी के नाम पर हैं।यह कंपनी कथित तौर पर मुक्तार अंसारी और उनके सहयोगियों द्वारा संचालित थी। जांच में पता चला कि कंपनी ने सरकारी जमीन पर अवैध गोदाम बनाए और उन्हें एफसीआई (फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) को किराए पर देकर करोड़ों की कमाई की। इसके अलावा सब्सिडी और अन्य अवैध स्रोतों से अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) हासिल की गई। कुल मिलाकर 27.72 करोड़ रुपये की अवैध आय का पता चला है। यह इस मामले में चौथा कुर्की आदेश है, जिससे कुल कुर्की 8.43 करोड़ रुपये हो गई है।शादाब अहमद को अक्टूबर 2025 में शारजाह से लौटते समय लखनऊ एयरपोर्ट पर एलओसी (लुक आउट सर्कुलर) के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।

उन्हें पीएमएलए कोर्ट में पेश कर हिरासत में लिया गया। ईडी की यह कार्रवाई मुक्तार अंसारी की मौत के बाद भी उनके गिरोह को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अंसारी पर हथियार, गैंगस्टर एक्ट और कई हत्याओं के मामले थे। उनकी मौत के बाद उनके भाई, बेटे और सहयोगियों पर ईडी और पुलिस की नजर है।

हत्या के मामले: राज्य में बढ़ते अपराध की चिंता

उत्तर प्रदेश में हत्या के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। दिसंबर में कई सनसनीखेज घटनाएँ हुईं। हाल ही में एक ट्रिपल मर्डर केस में दिल्ली पुलिस ने बेटे को गिरफ्तार किया, लेकिन यूपी में भी पारिवारिक विवादों से हत्याएँ हो रही हैं।

कौशांबी में होली के दिन पुरानी रंजिश में एक युवक को गोली मारकर हत्या कर दी गई। हाथरस में एक व्यक्ति ने पत्नी को चाकू मारकर殺 किया और झगड़े में उसका दोस्त भी मारा गया। आगरा में एक महिला को कोर्ट से लौटते समय गोली मार दी गई, जिसमें पति पर शक है। फिरोजाबाद में 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा हुई।

इसके अलावा अवैध खनन और संपत्ति विवाद में कई हत्याएँ हुईं।एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अपराध दर सबसे ज्यादा है, खासकर एससी/एसटी के खिलाफ अपराध और हत्याएँ। पुलिस ने साइबर क्राइम के लिए 57 नए थाने खोलने की योजना बनाई है। योगी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर जोर दे रही है, लेकिन विपक्ष इसे नाकाफी बता रहा है।

ये घटनाएँ दिखाती हैं कि राज्य में अपराध पर नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई हो रही है, लेकिन पुराने मामले और माफिया नेटवर्क अभी भी चुनौती बने हुए हैं। अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी और ईडी की कुर्की से सत्ता और विपक्ष के बीच नया विवाद शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में इन मामलों पर कोर्ट की सुनवाई और जांच से और खुलासे हो सकते हैं।

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रणधीर आनंद पांडेय

रणधीर आनंद पांडेय ब्यूरो चीफ रिलाएबल मीडिया भारत बस्ती ,उत्तर प्रदेश है RMB में 10 वर्षो से रहकर पत्रकारिता कर रहे है।