पहले बौद्ध युवती संग निकाह, फिर दूसरी रेजिडेंट डॉक्टर पर धर्मांतरण का दबाव: लखनऊ KGMU में मुस्लिम DR का चौंकाने वाला कांड!
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे मेडिकल समुदाय को हिलाकर रख दिया है। एक मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर पर पहले एक बौद्ध युवती से निकाह करने और फिर दूसरी बौद्ध रेजिडेंट डॉक्टर पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगा है। यह घटना न केवल प्रेम, धोखे और धार्मिक संवेदनशीलता की जटिलताओं को उजागर करती है, बल्कि मेडिकल संस्थानों में नैतिकता की कमी पर भी सवाल खड़े करती है।
घटना का पूरा विवरण
केजीएमयू के रेजिडेंट डॉक्टर विभाग में काम करने वाली एक बौद्ध युवती, जो पश्चिम बंगाल की रहने वाली बताई जा रही है, की मुलाकात एक मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर से काम के दौरान हुई। आरोप है कि आरोपी डॉक्टर ने प्रेम का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए और शादी का वादा किया। लेकिन जब शादी की बात आगे बढ़ी, तो उसने शर्त रखी कि पीड़िता को इस्लाम कबूल करना होगा। पीड़िता ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया, जिसके बाद आरोपी ने उसे छोड़ दिया।
परिजनों के मुताबिक, यह कोई पहला मामला नहीं था। आरोपी ने पहले फरवरी 2025 में एक अन्य बौद्ध युवती का धर्म परिवर्तन कराकर उससे निकाह कर लिया था। यह बात पीड़िता को बाद में पता चली। आरोपी ने अपनी पिछली शादी को छिपाकर रखा और पीड़िता को फंसाया। जब सच सामने आया, तो उसने दूसरी शादी के लिए फिर वही शर्त रखी- धर्म बदलो। इससे आहत पीड़िता गंभीर मानसिक तनाव में चली गई और दवाओं का ओवरडोज लेकर सुसाइड का प्रयास किया। उसे तुरंत KGMU के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
पीड़िता का परिवार और आरोप
पीड़िता के परिवार वाले लखनऊ पहुंचे और उन्होंने केजीएमयू प्रशासन से शिकायत की। परिवार का दावा है कि आरोपी ने प्रेमजाल में फंसाकर शोषण किया। उन्होंने कहा, “हमारी बेटी होस्टल में रहती थी, काम के सिलसिले में दोनों की निकटता बढ़ी। आरोपी ने शादी का लालच दिया, लेकिन असल में उसका मकसद धर्मांतरण था।” परिवार ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। दोनों पक्षों के परिवारजनों को कॉलेज प्रबंधन ने बुलाया है और जांच शुरू हो गई है।
यह मामला सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया। ट्विटर (अब X) पर कई पोस्ट्स में पीड़िता की हालत और आरोपी के कृत्यों पर गुस्सा जाहिर किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “KGMU में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जरूरी जांच होनी चाहिए।”
आरोपी डॉक्टर का इतिहास
आरोपी मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर के बारे में जानकारी मिली है कि वह पहले भी एक बौद्ध लड़की से जुड़ा था। फरवरी में उसने उसका धर्म परिवर्तन कर निकाह किया। अब इस दूसरी घटना ने सवाल उठाए हैं कि क्या यह उसकी सोची-समझी रणनीति थी? कॉलेज सूत्रों के अनुसार, आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर विभाग में सक्रिय था और कई लड़कियों से दोस्ती का आरोप लग रहा है। हालांकि, आरोपी पक्ष ने अभी कोई बयान नहीं दिया है।
KGMU प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रॉक्टर और अन्य अधिकारियों ने दोनों डॉक्टरों से बात की। पीड़िता को काउंसलिंग दी जा रही है।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव
यह घटना उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानूनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यूपी में ‘प्रेम विवाह के नाम पर धर्मांतरण रोकने’ वाला कानून सख्त है। ऐसे मामलों में 10 साल तक की सजा हो सकती है। परिवार अगर FIR दर्ज कराता है, तो आरोपी पर धोखाधड़ी, शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास का मुकदमा चलेगा।
मेडिकल कम्युनिटी में हड़कंप मच गया है। कई डॉक्टरों ने कहा कि ऐसे रिश्तों में सावधानी बरतनी चाहिए। यह केस लव जिहाद के रूप में भी चर्चा में है, हालांकि पुलिस जांच के बाद ही साफ होगा।
जांच और आगे की कार्रवाई A shocking incident involving a Muslim doctor at KGMU in Lucknow
केजीएमयू ने आंतरिक जांच कमिटी गठित की है। दोनों डॉक्टरों को नोटिस जारी हुआ। पीड़िता के परिवार ने मांग की है कि आरोपी को निलंबित किया जाए। पुलिस अगर केस लेती है, तो SIT बन सकती है। फिलहाल पीड़िता डिस्चार्ज हो चुकी है और परिवार के संरक्षण में है।
यह घटना समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक शिक्षा संस्थानों में भी धार्मिक कट्टरता कैसे घुसपैठ कर रही है। कुल मिलाकर, यह खबर न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि बड़े सामाजिक मुद्दे को उजागर करती है।
KGMU मामले में धर्म परिवर्तन के पीछे कोई स्पष्ट तर्क या मोटिव अभी सामने नहीं आया है। सभी रिपोर्ट्स में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर ने शादी के लिए ही धर्म बदलने की शर्त रखी बताई गई है, बिना किसी गहरे कारण का जिक्र।
परिवार का कहना है कि आरोपी ने प्रेम जाल बिछाकर शोषण किया और शादी की बात पर धर्मांतरण की शर्त ठोकी। पीड़िता ने इनकार किया तो संबंध तोड़ दिए। पहले भी फरवरी 2025 में एक लड़की का धर्मांतरण कर निकाह किया था.
KGMU प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की है, लेकिन आरोपी या उसके पक्ष की ओर से कोई बयान नहीं आया। पीड़िता के पिता ने सीएम पोर्टल और महिला आयोग में शिकायत की। पुलिस कार्रवाई का इंतजार।
KGMU धर्मांतरण मामले में अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है। पीड़िता के परिजनों ने CM पोर्टल, राज्य महिला आयोग और KGMU प्रशासन में शिकायत की है, लेकिन पुलिस को कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली।
यदि FIR दर्ज होती है, तो IPC की धारा 376 (बलात्कार/शोषण), 506 (धमकी), 420 (धोखाधड़ी) और UP धर्मांतरण विरोधी कानून (10 साल सजा) के तहत कार्रवाई संभव। फिलहाल KGMU ने आरोपी को नोटिस देकर जांच शुरू की।

भारत में आरक्षण (reservation) में बौद्ध धर्म की पात्रता मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से जुड़ी है। यहाँ विस्तार से समझते हैं:मुख्य नियम (संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950)
- मूल रूप से, 1950 के आदेश में केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों को SC का दर्जा मिलता था।
- 1956 में संशोधन कर सिख धर्म को शामिल किया गया।
- 1990 में संशोधन कर बौद्ध धर्म को भी शामिल किया गया।
इसका मतलब है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाने वाले व्यक्ति, जो मूल रूप से अनुसूचित जाति से हैं , SC आरक्षण (शिक्षा, नौकरी, चुनाव आदि में कोटा) का लाभ ले सकते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु
- आरक्षण जाति पर आधारित है, धर्म पर नहीं। लेकिन SC दर्जे के लिए व्यक्ति को हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म का ही होना जरूरी है।
- अगर कोई SC व्यक्ति बौद्ध धर्म अपनाता है , तो उसे SC आरक्षण मिलता रहता है। जाति प्रमाण पत्र में पहले की जाति (जैसे “महार”) और “बौद्ध” धर्म लिखा जाता है।
- अगर कोई सामान्य वर्ग (General) का व्यक्ति बौद्ध बनता है, तो उसे SC/ST आरक्षण नहीं मिलता।
- अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए कोई धर्म की शर्त नहीं है। ST आरक्षण किसी भी धर्म के व्यक्ति को मिल सकता है।
- OBC या EWS आरक्षण में कोई धर्म की बाध्यता नहीं है। बौद्ध धर्म के लोग OBC/SC/ST से संबंधित होने पर इनका लाभ ले सकते हैं।
वर्तमान स्थिति (2025 तक)
- कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। SC आरक्षण अभी भी केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लिए ही सीमित है।
- मुस्लिम या ईसाई दलितों को SC दर्जा नहीं मिलता (सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं)।
- महाराष्ट्र जैसे राज्यों में नवबौद्धों को SC प्रमाण पत्र और आरक्षण आसानी से मिलता है।
- केंद्र सरकार की योजनाओं में भी बौद्ध अपनाने वाले SC लोगों को लाभ मिलता है।

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

