प्रयागराज में ब्राह्मण नाबालिग लड़की लापता : परिवार का आरोप- दलित युवक ने किया अपहरण
प्रयागराज, 14 दिसंबर 2025A Brahmin minor girl has gone missing in Prayagraj. : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के सोरांव थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां की 12 वर्षीय ब्राह्मण नाबालिग लड़की प्रिया मिश्रा 9 नवंबर 2025 से लापता है। परिवारवालों का आरोप है कि एक दलित युवक ने लड़की को बहला-फुसलाकर या अगवा कर ले गया है।
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर जातीय तनाव को बढ़ावा दिया है, जबकि पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं। लड़की के परिजन पिछले एक महीने से थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह मामला न केवल एक नाबालिग की सुरक्षा का सवाल उठाता है, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और सामाजिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
प्रिया मिश्रा सोरांव थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है। परिवार के अनुसार, 9 नवंबर को प्रिया घर से स्कूल या किसी काम से निकली थी, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटी। शुरुआत में परिवार ने आसपास खोजबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। परिजनों का दावा है कि लड़की के लापता होने से पहले वह एक स्थानीय दलित युवक के संपर्क में थी।
युवक ने उसे प्रेमजाल में फंसाकर या जबरन ले जाने की कोशिश की। परिवार ने युवक का नाम भी पुलिस को बताया है, लेकिन पुलिस ने अभी तक उसे हिरासत में नहीं लिया है।परिजनों ने आरोप लगाया कि मामला जातीय होने के कारण पुलिस तत्परता नहीं दिखा रही। “हम ब्राह्मण हैं और आरोपी दलित समुदाय से है। अगर उल्टा होता तो पुलिस तुरंत एक्शन लेती,” एक परिजन ने कहा। थाने के बाहर धरना दे रहे परिवार के सदस्यों का कहना है कि पुलिस केवल खानापूर्ति कर रही है।
सीसीटीवी फुटेज खंगालने, संदिग्ध की लोकेशन ट्रेस करने या आसपास के जिलों में सर्च ऑपरेशन चलाने जैसी बुनियादी कार्रवाइयां भी नहीं की गईं। एक महीना बीत जाने के बावजूद लड़की का कोई पता नहीं चला, जिससे परिवार में दहशत का माहौल है।
पुलिस का पक्ष और जांच की स्थिति
सोरांव थाना प्रभारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मामला दर्ज है और जांच चल रही है। “हमने गुमशुदगी की रिपोर्ट ली है और टीमें गठित की गई हैं। संदिग्ध युवक से पूछताछ की जा रही है।” हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि युवक को हिरासत में लिया गया है या नहीं। प्रयागराज पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मामला संवेदनशील है और जातीय कोण को देखते हुए सावधानी बरती जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था बिगड़े नहीं।
लेकिन परिजनों का कहना है कि यह सावधानी लापरवाही का रूप ले चुकी है।उत्तर प्रदेश में नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामले आम हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में यूपी में हजारों नाबालिग गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए, जिनमें कई अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाने के थे। प्रयागराज जैसे जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी घटनाएं ज्यादा सामने आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, मोबाइल और अंतर-जातीय संबंधों के बढ़ते मामलों ने ऐसे अपराधों को बढ़ावा दिया है।
जातीय कोण और सामाजिक प्रभाव A Brahmin minor girl has gone missing in Prayagraj.
यह मामला शुद्ध अपराध से आगे जातीय आयाम ले चुका है। स्थानीय स्तर पर ब्राह्मण और दलित समुदायों में तनाव बढ़ गया है। कुछ संगठनों ने परिवार के समर्थन में प्रदर्शन किए, जबकि अन्य ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की। सोशल मीडिया पर भी यह मामला वायरल हो रहा है, जहां लोग पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं। “क्या जाति के आधार पर न्याय अलग-अलग होता है?” यह सवाल बार-बार उठ रहा है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि नाबालिग की सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए, जाति चाहे जो हो। लेकिन अगर पुलिस जातीय दबाव में आकर कार्रवाई नहीं करती तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। वहीं, दलित संगठनों ने कहा कि बिना सबूत के आरोप लगाना गलत है और अगर युवक निर्दोष निकला तो यह उत्पीड़न होगा।
परिवार की पीड़ा और प्रदर्शन
प्रिया के पिता एक छोटे किसान हैं। घर में मां और अन्य परिजन सदमे में हैं। “हमारी बेटी सिर्फ 12 साल की है। एक महीना हो गया, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही। हम थाने के बाहर बैठे हैं, रात गुजार रहे हैं,” पिता ने रोते हुए कहा। प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। उन्होंने डीएम और एसएसपी से मिलने की मांग की है।परिवार ने उच्च अधिकारियों से एसआईटी गठित करने और सीबी-सीआईडी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन करेंगे।
विशेषज्ञों की राय
बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिग लापता मामलों में पहली 48 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। देरी से अपहरण, ट्रैफिकिंग या अन्य अपराध की आशंका बढ़ जाती है। यूपी पुलिस को POCSO एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि अंतर-जातीय संबंधों को अपराध का रूप देना गलत है, लेकिन नाबालिग होने के कारण यह गंभीर मामला है।
आगे की संभावनाएं
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही लड़की बरामद होगी। लेकिन एक महीने की देरी से उम्मीदें कम हो रही हैं। अगर लड़की नहीं मिली तो यह मामला राजनीतिक रंग ले सकता है। विपक्षी दल इसे मुद्दा बना सकते हैं।
यह घटना समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि नाबालिगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। जाति, धर्म से ऊपर उठकर न्याय होना चाहिए। प्रिया की जल्द वापसी की कामना के साथ पूरा इलाका इंतजार कर रहा है।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और परिवार के आरोपों पर आधारित है। पुलिस जांच जारी है। कोई ठोस सबूत सामने आने पर अपडेट किया जाएगा।)
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राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

