अटल बिहारी वाजपेयी और राजकुमारी कौल: एक बेनाम रिश्ते की अनकही कहानी

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Atal Bihari Vajpayee and Rajkumari Kaul The untold story of an unnamed relationship

भारतीय राजनीति के इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता के रूप में याद किए जाते हैं, जिन्होंने अपनी कविता, वाक्पटुता और उदारवादी सोच से लाखों दिलों को जीता। वे तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने, परंतु उनकी निजी जिंदगी हमेशा एक रहस्य बनी रही। अटल जी आजीवन अविवाहित रहे, लेकिन उनके जीवन में एक महिला की मौजूदगी थी, जिसे राजनीतिक गलियारों से लेकर आम चर्चाओं तक एक ‘बेनाम रिश्ते’ के रूप में जाना गया।

वह महिला थीं राजकुमारी कौल। यह रिश्ता न तो कभी सार्वजनिक रूप से नाम दिया गया, न ही कभी स्पष्ट किया गया, लेकिन दशकों तक यह अटल जी के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा। कई जीवनीकारों और समकालीनों ने इसे एक गहन भावनात्मक और बौद्धिक जुड़ाव बताया है, जो पारंपरिक विवाह की सीमाओं से परे था।

इस रिश्ते की शुरुआत हुई 1940 के दशक में, जब अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज) में पढ़ाई कर रहे थे। उस समय राजकुमारी हक्सर (बाद में कौल) भी वहीं छात्रा थीं। दोनों की मुलाकात कॉलेज के दिनों में हुई। राजकुमारी एक प्रतिष्ठित कश्मीरी पंडित परिवार से थीं, जिनका इंदिरा गांधी से भी रक्त संबंध था। अटल जी मध्यवर्गीय परिवार से थे, लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता और आकर्षण ने राजकुमारी को प्रभावित किया।

कुछ किताबों में वर्णन है कि अटल जी ने लाइब्रेरी की किताब में छिपाकर राजकुमारी को प्रेम पत्र लिखा था, लेकिन जवाब नहीं मिला। बाद में पता चला कि जवाब दिया गया था, पर वह गुम हो गया। यह एक अधूरी शुरुआत थी, जो जीवनभर साथ चली।1947 के दंगों के बाद राजकुमारी का परिवार दिल्ली चला गया। उनके पिता ने उनकी शादी दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बृज नारायण कौल से करा दी। राजकुमारी ने परिवार की इच्छा का सम्मान किया, जबकि अटल जी अविवाहित रहे।

कई स्रोतों के अनुसार, राजकुमारी अटल से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक दबावों ने इसे असंभव बना दिया। अटल जी ने कभी शादी नहीं की, शायद इसी वजह से।1950 के दशक में दोनों की फिर मुलाकात हुई, जब अटल जी सांसद बन चुके थे और दिल्ली में थे। राजकुमारी रामजस कॉलेज के वार्डन क्वार्टर में अपने पति के साथ रहती थीं।

अटल जी उनके घर आने-जाने लगे। धीरे-धीरे यह संबंध गहरा हुआ। प्रोफेसर कौल ने इस दोस्ती को स्वीकार किया और अटल जी को परिवार का सदस्य मान लिया। कई जीवनीकारों ने इसे एक असामान्य व्यवस्था बताया, जहां तीनों एक साथ रहते थे। अलग-अलग कमरे थे, लेकिन घर एक था। अटल जी प्रोफेसर कौल को ‘कौल साहब’ कहकर सम्मान देते थे।राजकुमारी कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को अटल जी ने गोद लिया था।

नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य

नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य तथा उनकी बेटी निहारिका भी अटल जी के परिवार का हिस्सा बने। जब अटल जी 1998-2004 तक प्रधानमंत्री थे, तब राजकुमारी कौल, नमिता और उनका परिवार प्रधानमंत्री निवास (7 रेस कोर्स रोड) में उनके साथ रहते थे। राजकुमारी घर की देखभाल करती थीं, अटल जी की दवाइयों का ध्यान रखती थीं, लेकिन प्रोटोकॉल में उन्हें कोई आधिकारिक जगह नहीं थी। वे कभी विदेशी दौरों पर नहीं गईं, न ही सार्वजनिक कार्यक्रमों में होस्टेस की भूमिका निभाई। फिर भी, घरेलू मामलों में उनकी मौजूदगी अटल जी के लिए एक मजबूत सहारा थी।

यह रिश्ता राजनीतिक रूप से विवादास्पद रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और जनसंघ को शुरू में आपत्ति थी, क्योंकि संघ ब्रह्मचर्य को महत्व देता है। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि अटल जी या तो राजकुमारी से विवाह करें या रिश्ता तोड़ें, लेकिन अटल जी ने इनकार कर दिया। समय के साथ संघ ने इसे स्वीकार कर लिया। कई किताबों में लिखा है कि राजकुमारी ने अटल जी को अधिक उदार, धर्मनिरपेक्ष और कॉस्मोपॉलिटन बनाया।

Atal Bihari Vajpayee and Rajkumari Kaul: The untold story of an unnamed relationship

उनकी बौद्धिक चर्चाएं अटल जी की सोच को प्रभावित करती थीं।अटल जी ने कभी इस रिश्ते पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा नहीं बोला। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे राजकुमारी कौल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “कश्मीर जैसा मामला है।” एक अन्य साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “अफेयर का चर्चा सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता।

” राजकुमारी ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि उनके और अटल जी के रिश्ते को स्पष्ट करने की जरूरत कभी नहीं पड़ी।यह रिश्ता न तो कभी ‘अवैध’ साबित हुआ, न ही कोई कानूनी विवाद हुआ। यह एक निजी, भावनात्मक जुड़ाव था, जो सामाजिक मानदंडों से परे था। कुछ जीवनीकार इसे गहन प्रेम कहते हैं, तो कुछ बौद्धिक मित्रता। लेकिन सभी सहमत हैं कि राजकुमारी अटल जी की जिंदगी में एक ‘खामोश शक्ति’ थीं। राजकुमारी का निधन 2014 में हुआ, अटल जी का 2018 में।

उनके जाने के बाद नमिता ने अटल जी की अंत्येष्टि में मुखाग्नि दी।भारतीय राजनीति में ऐसे रिश्ते दुर्लभ हैं। यह न तो बॉलीवुड की तरह नाटकीय था, न ही विवादों से भरा। यह एक शांत, गहन और बेनाम साथ था, जो अटल जी की कविता की तरह था – भावपूर्ण, लेकिन अनकहा। आज जब हम अटल जी को याद करते हैं, तो यह रिश्ता उनकी मानवीयता को और गहरा बनाता है। वे एक महान नेता थे, लेकिन एक इंसान भी, जिसने प्रेम को नाम देने की जरूरत नहीं समझी।

यह लेख उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों – जैसे सागरिका घोष, विनय सीतापति, अभिषेक चौधरी और अन्य जीवनीकारों की किताबों तथा समाचार रिपोर्टों – पर आधारित है। यह रिश्ता निजी था और इसे सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए।

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Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।