भारतीय ज्ञान प्रणाली पर राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से जुटेंगे पुस्तकालय एवं ज्ञान-विज्ञान के विशेषज्ञ

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जी.बी. पंत संस्थान में 10 अक्टूबर को होगा राष्ट्रीय सम्मेलन, 150 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना

प्रयागराज, 6 अक्टूबर 2026। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और उसे आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की चुनौतियों से जोड़ने के उद्देश्य से गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, झूंसी, प्रयागराज में 10 अक्टूबर 2026 को “भारतीय ज्ञान प्रणाली : पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चुनौतियों के बीच सेतु” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। संस्थान की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सम्मेलन का आयोजन एसोसिएशन ऑफ इंडियन लॉ लाइब्रेरीज के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।

सम्मेलन का शुभारंभ प्रातः 9 बजे गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, झूंसी, प्रयागराज में होगा। सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 150 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, नीति आयोग पुस्तकालय सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के पुस्तकालयाध्यक्ष, सूचना विज्ञान विशेषज्ञ, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे।

70 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे

संस्थान की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सम्मेलन के लिए 70 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं। इनमें भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्ञान संरक्षण, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक सूचना सेवाओं और बदलते दौर में पुस्तकालयों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध प्रस्तुत किए जाएंगे।

सम्मेलन में इस बात पर विशेष विमर्श होगा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को संरक्षित करने, उसका दस्तावेजीकरण करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में पुस्तकालय किस तरह प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। बदलते डिजिटल परिवेश में पुस्तकालयों की भूमिका अब केवल पुस्तकों और दस्तावेजों के संग्रह तक सीमित नहीं रह गई है। वे शोध, सूचना के प्रसार, ज्ञान के संरक्षण और समाज में ज्ञान निर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के बीच संवाद पर जोर

सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक ज्ञान व्यवस्था के बीच संवाद स्थापित करना है। इसमें यह विचार किया जाएगा कि डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक सूचना संसाधनों का उपयोग भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं प्रसार के लिए किस प्रकार किया जा सकता है।

संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह की ओर से जारी जानकारी में कहा गया है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और उसके व्यापक प्रसार के लिए संस्थान लगातार प्रयासरत है। संस्थान ने पहले भी भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े कार्यक्रमों और कार्यशालाओं का आयोजन किया है। मई 2026 में संस्थान में ‘भारतीय ज्ञान मंथन’ कार्यशाला भी आयोजित हुई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली विश्वकोश के निर्माण की दिशा में कार्य करना था।

राष्ट्रीय सलाहकार मंडल में कई प्रतिष्ठित संस्थान

सम्मेलन के राष्ट्रीय सलाहकार मंडल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली, नीति आयोग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय और मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

इसके अलावा प्रयागराज और आसपास के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों के पुस्तकालयाध्यक्ष एवं पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विशेषज्ञ भी सम्मेलन में बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे।

भारतीय ज्ञान प्रणाली विश्वकोश की दिशा में भी कार्य

गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और उसके व्यापक प्रसार के लिए ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र’ की स्थापना तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली के विश्वकोश के निर्माण की दिशा में भी कार्य कर रहा है। मई में संस्थान की ओर से बताया गया था कि प्रस्तावित विश्वकोश में वेद, उपनिषद, दर्शन, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान के साथ लोक परंपराओं, जनजातीय ज्ञान, कृषि, पर्यावरणीय ज्ञान और मौखिक परंपराओं जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा।

संस्थान के अनुसार इस कार्य को वैज्ञानिक, बहुभाषीय और आधुनिक डिजिटल अभिलेखीकरण तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ाने की योजना है।

पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर भी होगी चर्चा

सम्मेलन में पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर विशेष चर्चा प्रस्तावित है। वक्ताओं और विशेषज्ञों द्वारा इस बात पर विचार किया जाएगा कि डिजिटल युग में पुस्तकालय केवल पुस्तकों के संरक्षण स्थल न रहकर ज्ञान, शोध, नवाचार और सूचना के प्रसार के केंद्र किस प्रकार बन सकते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग के बीच पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के पेशेवरों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव आया है। सूचना की विश्वसनीयता, डिजिटल संरक्षण, शोध सामग्री की उपलब्धता और ज्ञान के व्यवस्थित वर्गीकरण जैसे मुद्दे आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

शोध-पत्रों और अकादमिक विमर्श का होगा प्रकाशन

सम्मेलन के शोध-पत्रों एवं अकादमिक विमर्श को संकलित करते हुए सम्मेलन की कार्यवाही (Proceedings) प्रकाशित की जाएगी। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े शोध और विचारों को व्यापक अकादमिक समुदाय तक उपलब्ध कराना है।

संस्थान का मानना है कि इससे भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े शोधकर्ताओं, शिक्षकों, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के पेशेवरों और विद्यार्थियों को एक साझा मंच मिलेगा तथा इस क्षेत्र में आगे के शोध के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।

निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया—ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी

गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं उसके व्यापक प्रसार के लिए विभिन्न अकादमिक पहल कर रहा है। इससे पहले भी संस्थान में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। फरवरी 2026 में संस्थान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा: दार्शनिक आधार, साहित्यिक स्रोत और लोक परंपराएं’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई थी।

प्रो. सिंह का कहना है कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल अतीत के अध्ययन तक सीमित रखने के बजाय उसे वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ना आवश्यक है। इसी दृष्टि से पुस्तकालयों, ज्ञान संस्थानों और आधुनिक तकनीक के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वीडियो संदेश/साक्षात्कार

इस राष्ट्रीय सम्मेलन और भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े संस्थान के प्रयासों पर गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह का वीडियो भी उपलब्ध है।

वीडियो देखें:
प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह का वीडियो संदेश/साक्षात्कार

विकसित भारत के लिए ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भ से जोड़ने की पहल

राष्ट्रीय सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक ज्ञान व्यवस्था के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। सम्मेलन में होने वाली चर्चा से यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शोध, डिजिटल तकनीक और सूचना संसाधनों के साथ जोड़कर नई पीढ़ी के लिए अधिक उपयोगी और सुलभ कैसे बनाया जा सकता है।

जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान की वेबसाइट पर भी इस सम्मेलन का विषय “Bhartiya Knowledge System: Bridging Traditional Wisdom and Modern Challenges for Viksit Bharat” दर्ज है और सम्मेलन की तिथि 10 अक्टूबर 2026 दी गई है।

कुल मिलाकर, प्रयागराज में होने वाला यह राष्ट्रीय सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा, पुस्तकालय विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी और आधुनिक शोध व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण अकादमिक संवाद का मंच बनने जा रहा है। इससे न केवल भारतीय ज्ञान के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण को गति मिलने की उम्मीद है, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी और व्यापक समाज तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल होगी।

Editor's PickPrayagrajUttar Pradesh

Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।