प्रयागराज: न्यूरो सर्जन डॉ. कार्तिकेय शर्मा पर इलाज के बहाने बैडटच का गंभीर आरोपम, FIR दर्ज Neurosurgeon Dr. Kartikeya Sharma Faces Grave Allegations
प्रयागराज।प्रयागराज: न्यूरो सर्जन डॉ. कार्तिकेय शर्मा पर इलाज के बहाने बैडटच का गंभीर आरोपम, FIR दर्ज Neurosurgeon Dr. Kartikeya Sharma Faces Grave Allegations शहर के चर्चित न्यूरो सर्जन डॉ. कार्तिकेय शर्मा पर एक बीए छात्रा ने इलाज के दौरान छेड़खानी और बैडटच का संगीन आरोप लगाया है। क्लाइव रोड स्थित उनके क्लिनिक में बुधवार देर रात हंगामा हो गया, जिसके बाद सिविल लाइंस पुलिस ने FIR दर्ज कर ली।
घटना का पूरा विवरण
घटना 1 अप्रैल 2026 को रात करीब 10:30 बजे क्लाइव रोड पर डॉ. कार्तिकेय शर्मा के आवासीय क्लिनिक में घटी। धूमनगंज क्षेत्र की रहने वाली 24 वर्षीय बीए छात्रा अपने भाई के साथ माइग्रेन की शिकायत लेकर इलाज के लिए पहुंची थी। उन्हें टोकन नंबर 74 मिला था। छात्रा के भाई को किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़ा, जिससे वह अकेली डॉक्टर के कक्ष में चली गई।
छात्रा का आरोप है कि डॉक्टर ने केबिन का दरवाजा लॉक कर दिया और माइग्रेन चेकअप के बहाने उसके ऊपरी कपड़े उतरवा दिए। उसके बाद गलत नियत से उसके शरीर को छुआ और अभद्र हरकतें कीं। जैसे ही भाई लौटा, छात्रा रोते हुए बाहर निकली और पूरे क्लिनिक में चीख-पुकार मच गई। परिवार वाले इकट्ठा हुए और अस्पताल में भारी हंगामा हुआ। पुलिस को सूचना मिलते ही सिविल लाइंस थाने की टीम पहुंची।
पीड़िता ने बताया कि डॉक्टर ने कहा था कि “माइग्रेन का सही इलाज करने के लिए ऊपरी जांच जरूरी है”, लेकिन उनकी नीयत गलत थी। भाई ने पुलिस को शिकायत में कहा कि लौटने पर बहन बेहद परेशान थी और कपड़े ठीक करने की कोशिश कर रही थी। यह घटना न केवल पीड़िता के लिए ट्रॉमेटिक है, बल्कि पूरे चिकित्सा जगत पर सवाल खड़े कर रही है।
डॉक्टर का पक्ष Neurosurgeon Dr. Kartikeya Sharma Faces Grave Allegations
डॉ. कार्तिकेय शर्मा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रा पहले से उनके पास मानसिक तनाव और डिप्रेशन के इलाज के लिए आ चुकी थी। रूटीन चेकअप के दौरान उन्होंने केवल पेट की सामान्य जांच की थी, क्योंकि माइग्रेन कभी-कभी पेट संबंधी समस्याओं से जुड़ा होता है।tv9hindi+1
डॉक्टर के मुताबिक, क्लिनिक में महिला स्टाफ मौजूद थी, जो कुछ मिनट के लिए दूसरे मरीज को इंजेक्शन देने गई थी। उन्होंने किसी कपड़े उतरवाने या बैडटच जैसी कोई हरकत नहीं की। डॉक्टर ने इसे बदनामी का हथकंडा बताते हुए कहा कि वह वर्षों से प्रयागराज में सेवा दे रहे हैं और सैकड़ों मरीजों का सफल इलाज कर चुके हैं। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई
सिविल लाइंस पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर डॉ. कार्तिकेय शर्मा के खिलाफ IPC की धारा 354 (महिला की गरिमा का हनन), 354A (यौन उत्पीड़न) और अन्य संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने क्लिनिक से CCTV फुटेज, रजिस्टर और स्टाफ के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं।
एसपी सिटी आशीष गुप्ता ने बताया कि मामला गंभीर है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच में अगर आरोप सही पाए गए तो सख्त कार्रवाई होगी, वरना पीड़िता के खिलाफ भी एक्शन लिया जा सकता है। फिलहाल डॉक्टर फरार बताए जा रहे हैं।
डॉ. कार्तिकेय शर्मा का प्रोफाइल – Neurosurgeon Dr. Kartikeya Sharma Faces Grave Allegations
डॉ. कार्तिकेय शर्मा प्रयागराज के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन हैं, जो क्लाइव रोड पर अपने आवास पर ही क्लिनिक चलाते हैं। वे माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक और स्पाइनल सर्जरी के विशेषज्ञ माने जाते हैं। शहर के कई बड़े अस्पतालों से जुड़े रह चुके हैं और सोशल मीडिया पर उनके हजारों फॉलोअर्स हैं। मरीज उन्हें दूर-दराज से इलाज के लिए बुलाते हैं।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब डॉक्टर पर विवाद हुआ हो। पुरानी खबरों में उनका नाम रंगदारी जैसे मामलों में आया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह घटना उनकी प्रतिष्ठा पर बड़ा धब्बा लगा सकती है।
सामाजिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद महिलाओं के संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। AIMWA की अध्यक्ष ने कहा कि डॉक्टरों द्वारा मरीजों का शोषण असहनीय है। एकता फाउंडेशन ने क्लिनिक के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राइवेट क्लिनिक्स में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। कई महिलाओं ने अपनी पुरानी घटनाएं शेयर कीं। BJP ने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की, जबकि SP ने इसे सिस्टम की नाकामी बताया। प्रयागराज में चिकित्सा सुधार की मांग तेज हो गई है।
कानूनी पहलू
भारतीय कानून में डॉक्टरों को विशेष सुरक्षा है, लेकिन POCSO या IPC 354 जैसी धाराएं सख्त हैं। सुप्रीम कोर्ट के Vishaka गाइडलाइंस के तहत क्लिनिक्स में महिला स्टाफ अनिवार्य है। यहां स्टाफ की अनुपस्थिति सवाल खड़ी कर रही है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) जांच शुरू कर सकती है।
पीड़िता को काउंसलर सपोर्ट मिलेगा। केस मजिस्ट्रेट कोर्ट में चलेगा। अगर साबित हुआ तो 7 साल तक सजा हो सकती है। डॉक्टर की लाइसेंस रद्द होने का खतरा भी है।
प्रयागराज में महिलाओं पर अत्याचार
प्रयागराज (इलाहाबाद) में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। NCRB डेटा के अनुसार, 2025 में 354 धारा के 1200 से ज्यादा केस दर्ज हुए। प्राइवेट क्लिनिक्स हॉटस्पॉट हैं। प्रशासन ने विशेष हेल्पलाइन शुरू की है।
महिलाएं अकेले इलाज के लिए हिचकिचाती हैं। यह घटना जागरूकता बढ़ाएगी। NGOs ने फ्री लीगल एड कैंप लगाए।
भविष्य की संभावनाएं
पुलिस जांच 48 घंटे में पूरी हो सकती है। CCTV अगर उपलब्ध हुआ तो सच सामने आ जाएगा। डॉक्टर अगर बरी हुए तो मानहानि का केस करेंगे। पीड़िता को जस्टिस मिलना चाहिए।
निष्कर्ष
यह घटना चिकित्सा नैतिकता पर सवाल उठाती है। डॉक्टर भगवान होते हैं, लेकिन विश्वास तोड़ना अपराध है। rmbnews.in इसकी गहन फॉलोअप करेगा।
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