जनसत्तादल लोकतान्त्रिक पार्टी महानगर प्रयागराज अध्यछ एस पी सिंह एडवोकेट ने बुलाई आपात बैठक छात्रसंघ आंदोलन को दिया पूर्ण समर्थन
Full support to the student movement महानगर अध्यक्ष एस.पी. सिंह एडवोकेट ने बुलाई आपात बैठक, पियूष सिंह सोमवंशी के नेतृत्व को सराहा
Prayagraj 5 दिसंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ के पुनर्जनन के लिए चल रहे आंदोलन को आज एक बड़ा राजनीतिक बल मिल गया। जनसत्तादल लोकतान्त्रिक पार्टी के महानगर प्रयागराज अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एस.पी. सिंह ने पार्टी कार्यालय में आपात बैठक बुलाकर पियूष सिंह सोमवंशी के नेतृत्व में चल रहे छात्रसंघ बहाली आंदोलन को पार्टी का पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
बैठक में मौजूद सैकड़ों कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से इस फैसले का स्वागत किया।
एस.पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “एक अच्छा छात्र ही एक अच्छा नेता बन सकता है। छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला होता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे गौरवशाली संस्थान में छात्रसंघ का न होना न सिर्फ छात्रों के साथ अन्याय है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार से तत्काल प्रभाव से छात्रसंघ बहाल करने की मांग की।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव आखिरी बार 2005-06 में हुए थे। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के बाद कई तकनीकी कारणों और प्रशासनिक आनाकानी के चलते पिछले 18 वर्षों से छात्रसंघ पूरी तरह ठप है। इस दौरान विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याएं बढ़ती गईं, लेकिन कोई चुना हुआ प्रतिनिधि उनकी आवाज उठाने के लिए नहीं रहा।
हाल के महीनों में पियूष सिंह सोमवंशी के नेतृत्व में पूर्व छात्रनेताओं, वर्तमान छात्रों और सामाजिक संगठनों ने मिलकर “इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली मंच” का गठन किया। धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन, सोशल मीडिया कैंपेन और कोर्ट में जनहित याचिका तक इस आंदोलन ने हर मोर्चे पर संघर्ष किया है। अब जनसत्तादल लोकतान्त्रिक जैसी प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी का खुला समर्थन मिलने से आंदोलन को नया जोश और व्यापक जनाधार मिलने की उम्मीद है।
शुक्रवार शाम पार्टी के सिविल लाइन्स स्थित कार्यालय में आयोजित आपात बैठक में महानगर के सैकड़ों कार्यकर्ता और छात्र नेता मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एस.पी. सिंह ने कहा, “हमारे युवा साथी पियूष सिंह सोमवंशी जिस दृढ़ता और संयम से आंदोलन चला रहे हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। जनसत्तादल लोकतान्त्रिक उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। जरूरत पड़ी तो हम सड़क से लेकर सदन तक यह लड़ाई लड़ेंगे।
”बैठक में मौजूद प्रमुख लोग:
- आदर्श सिंह भदौरिया
- नितीश मिश्रा
- शिवम् बाबा
- अमित उपाध्याय
- अमन तिवारी
- पियूष सिंह सोमवंशी (छात्रसंघ बहाली मंच संयोजक)
- इसके अलावा सैकड़ों कार्यकर्ता और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व एवं वर्तमान छात्र।
छात्रों ने क्या कहा?
पियूष सिंह सोमवंशी ने जनसत्तादल लोकतान्त्रिक के समर्थन पर खुशी जताते हुए कहा, “यह हमारे आंदोलन की पहली बड़ी राजनीतिक जीत है। एस.पी. सिंह जी जैसे वरिष्ठ नेता और जनसत्तादल लोकतान्त्रिक का साथ मिलने से हमारा मनोबल सातवें आसमान पर है। अब हम विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए और बड़ा जनआंदोलन खड़ा करेंगे।”आदर्श सिंह भदौरिया ने कहा, “छात्रसंघ सिर्फ चुनाव नहीं, लोकतंत्र की ट्रेनिंग है। जिस देश में छात्रों की आवाज दबाई जाती है, वहां लोकतंत्र कमजोर होता है। जनसत्तादल पूरे उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को उठाएगा।”
आगे की रणनीति – Full support to the student movement
बैठक में निम्नलिखित फैसले लिए गए:
- 10 दिसंबर को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर विशाल धरना-प्रदर्शन।
- कुलपति को 15 दिसंबर तक का अल्टीमेटम, उसके बाद आमरण अनशन की चेतावनी।
- राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन।
- सोशल मीडिया पर #RestoreAUSU हैशटैग के साथ व्यापक कैंपेन।
- सामाजिक संगठनों से भी समर्थन जुटाने का निर्णय।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास
इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने देश को चंद्रशेखर, हेमवती नंदन बहुगुणा, वी.पी. सिंह, शंकर दयाल शर्मा जैसे दर्जनों बड़े नेता दिए हैं, जो कभी इसी विश्वविद्यालय के छात्रसंघ नेता रहे। गोविंद बल्लभ पंत, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे मुख्यमंत्री भी इसी विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की देन हैं। लेकिन पिछले 18 साल से छात्रसंघ बंद होने के कारण नई पीढ़ी नेतृत्व के इस पाठशाला से वंचित है।एस.पी. सिंह ने कहा, “इलाहाबाद विश्वविद्यालय सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं, देश की राजनीतिक नर्सरी है। इसे छात्रसंघ विहीन रखना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”
जनसत्तादल लोकतान्त्रिक का यह समर्थन इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली आंदोलन के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार इस जनाकांक्षा का कितना सम्मान करती है।
छात्रों का कहना है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। उनका एक ही नारा है, “छात्रसंघ बहाली तक जंग जारी।”


राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

