राजस्थान- शेरूणा गांव में 18 साल की ब्राह्मण लड़की की दुष्कर्म के बाद हत्या
A Brahmin girl was raped and murdered in Sheruna. राजस्थान के बीकानेर जिले के शेरूणा गांव में 18 साल की ब्राह्मण लड़की की दुष्कर्म के बाद हत्या, गांव में तनाव, संतोष वर्मा का पुराना बयान फिर गर्माया
बीकानेर, 11 दिसंबर 2025
राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के शेरूणा गांव में 2 दिसंबर की शाम एक 18 वर्षीय ब्राह्मण लड़की रहस्यमय तरीके से घर से गायब हो गई थी। अगले दिन यानी 3 दिसंबर की सुबह उसका शव गांव से करीब 500 मीटर दूर एक तालाब में तैरता मिला। परिजनों ने अपने ही खेत में बने मकान में रहने वाले जोरा राम (उम्र करीब 35 वर्ष) पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उसने लड़की का अपहरण किया, दुष्कर्म किया, फिर गला दबाकर हत्या कर दी और शव को तालाब में फेंक दिया ताकि सबूत मिट जाएं।
परिजनों की शिकायत पर शेरूणा थाना पुलिस ने तत्काल प्रभाव से जोरा राम को हिरासत में ले लिया और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 376 (दुष्कर्म), 363 (अपहरण), 201 (सबूत मिटाने) तथा POCSO एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। चूंकि लड़की नाबालिग (18 वर्ष से कम) थी, इसलिए POCSO एक्ट भी लागू किया गया है। पुलिस ने मौका-ए-वारदात की वीडियोग्राफी करवाई, फोरेंसिक टीम बुलाई और गांव में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज जब्त किए हैं। शव का पोस्टमॉर्टम बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में तीन डॉक्टरों के पैनल से करवाया गया है। रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन प्रथम दृष्टया गला दबाने और डूबने के निशान मिले हैं।
पूरा मामला उस समय सामने आया जब लड़की 2 दिसंबर की शाम घर से गायब हुई थी और अगले ही दिन उसकी लाश गांव से करीब 500 मीटर दूर तालाब में मिली। परिवार ने अपने ही खेत में रहने वाले जोरा राम पर दुष्कर्म, हत्या और सबूत छुपाने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद गांव में तनाव है और लोग इसे हाल ही में चर्चित हुए संतोष वर्मा के विवादित बयान से जोड़कर भी देख रहे हैं।
घटना का क्रमवार विवरण
परिजनों के अनुसार 2 दिसंबर 2025 की शाम करीब 4 बजे लड़की घर पर ही थी। वह अपनी मां के साथ कुछ घरेलू काम कर रही थी। अचानक वह घर से बाहर निकली और फिर लौटकर नहीं आई। परिजनों ने पहले तो सोचा कि वह पड़ोस या रिश्तेदारी में गई होगी, लेकिन जब रात 8-9 बजे तक वह नहीं लौटी तो खोजबीन शुरू हुई। पूरे गांव में रातभर लाउडस्पीकर से घोषणा की गई, टॉर्च लेकर लोग खेतों-खलिहानों में ढूंढते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
आखिरकार 3 दिसंबर की सुबह 1:43 बजे परिजनों ने शेरूणा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। सूचना मिलते ही थानाधिकारी अपने दल-बल के साथ गांव पहुंचे। तलाशी के दौरान सुबह करीब 7 बजे गांव के बाहर एक पुराने तालाब में लड़की का शव मिला। शव पर कपड़े अस्त-व्यस्त थे, गले पर निशान थे और मुंह से झाग निकला हुआ था। देखते ही देखते पूरे गांव में कोहराम मच गया।
आरोपी और उसका पिछला रिकॉर्ड A Brahmin girl was raped and murdered in Sheruna.
आरोपी जोरा राम मेघवाल समुदाय से है और पीड़िता के परिवार के ही खेत में बने एक छोटे से मकान में किराए पर रहता था। परिजनों का कहना है कि वह अक्सर उनके घर आता-जाता था और छोटे-मोटे काम करवाता था। लड़की उसे “चाचा” कहकर बुलाती थी। परिजनों का आरोप है कि जोरा राम पिछले काफी समय से लड़की पर गलत नजर रखे हुए था और मौका मिलते ही उसने यह जघन्य अपराध कर डाला।
ग्रामीणों ने बताया कि जोरा राम शराब का आदी है और पहले भी छोटे-मोटे झगड़ों में थाने के चक्कर लगा चुका है, हालांकि दुष्कर्म या हत्या जैसा कोई पुराना केस उसके खिलाफ नहीं था। पुलिस पूछताछ में वह बार-बार अपना बयान बदल रहा है। कभी कहता है कि उसे कुछ नहीं पता, कभी कहता है कि लड़की खुद उसके पास आई थी। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है।
गांव में तनाव, दो समुदायों के बीच खटास
घटना के बाद से शेरूणा और आसपास के गांवों में भारी तनाव है। एक तरफ ब्राह्मण समाज आक्रोशित है और कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ मेघवाल समाज के कुछ लोग आरोपी के पक्ष में खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई बड़ा उपद्रव नहीं हुआ है, लेकिन पुलिस ने गांव में भारी फोर्स तैनात कर रखी है। सरपंच और अन्य प्रभावशाली लोगों की बैठकें हो रही हैं ताकि शांति बनी रहे।
संतोष वर्मा का पुराना बयान फिर सुर्खियों में
इस घटना ने एक पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। कुछ महीने पहले राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा ने एक निजी समारोह में कथित तौर पर कहा था – “आरक्षण तब तक चलेगा, जब तक किसी ब्राह्मण घर की बेटी मेरे बेटे को दान में न दे।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और पूरे देश में भारी विवाद हुआ था। कई संगठनों ने इसे जातिवादी और आपत्तिजनक बताया था।अब शेरूणा कांड के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे उसी बयान से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि आरक्षण और जातिगत तनाव की आड़ में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। दूसरी तरफ दलित एवं पिछड़ा वर्ग के कुछ कार्यकर्ता इसे बदले की भावना से प्रायोजित साजिश बता रहे हैं। राजनीतिक दलों ने भी मौन साध रखा है, क्योंकि मामला बेहद संवेदनशील है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
नोखा डीएसपी ने बताया कि मामला अत्यंत गंभीर है और हर कोण से जांच की जा रही है।
जिले के आला अधिकारी खुद मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
आरोपी की नार्को टेस्ट की अनुमति के लिए कोर्ट में अर्जी दी जा रही है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि होने पर और धाराएं बढ़ेंगी।
गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।
पीड़िता के परिवार की गुहार
लड़की के पिता ने मीडिया से कहा, “हमारे घर की इकलौती बेटी थी। पढ़ने में होशियार थी, बारहवीं पास करके आगे पढ़ना चाहती थी। जोरा राम को हम अपने घर का सदस्य समझते थे, लेकिन उसने हमारी जिंदगी तबाह कर दी। हमारी बेटी को इंसाफ चाहिए, फांसी से कम कुछ नहीं।”मां अभी सदमे में हैं और बोल नहीं पा रही हैं। दादा-दादी और छोटे भाई-बहन का रो-रोकर बुरा हाल है
समाज और राजनीति पर प्रभाव
यह घटना राजस्थान में बढ़ती आपराधिक घटनाओं, खासकर महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर फिर से सवाल खड़े कर रही है। विपक्षी दल इसे सरकार की नाकामी बता रहे हैं तो सत्ताधारी दल इसे एक आपराधिक घटना करार देकर पल्ला झाड़ रहा है। महिला संगठनों ने जयपुर और बीकानेर में कैंडल मार्च निकालने की घोषणा की है।शेरूणा गांव की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक है कि जाति, आरक्षण और सामाजिक तनाव की आग में मासूम जिंदगियां कैसे झुलस रही हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायपालिका और प्रशासन कितनी तेजी से आरोपी को सजा दिला पाता है।
बेटियों की सुरक्षा पर फिर सवाल
यह घटना एक बार फिर राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। पिछले एक साल में कोटा, जोधपुर, अलवर, भीलवाड़ा के बाद अब डीडवाना में इस तरह की जघन्य वारदात ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक बेटियां इस तरह असुरक्षित रहेंगी? कब तक पुलिस शिकायतें नजरअंदाज करती रहेगी?आज शाम तक डीडवाना शहर में भारी पुलिस बल तैनात है। इंटरनेट सेवाएं कुछ इलाकों में निलंबित कर दी गई हैं। परिजनों ने मांग की है कि दोषियों को 90 दिन के अंदर फास्ट ट्रैक कोर्ट में फांसी की सजा दी जाए।

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

