बुलंदशहर: थाना चोला इलाके में गरीब ब्राह्मण परिवार के साथ अत्याचार

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बुलंदशहर/सुल्तानपुर : बुलंदशहर जिले के थाना चोला क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव में दबंगों द्वारा एक गरीब ब्राह्मण परिवार पर किया गया दरिंदगी भरा अत्याचार अब उत्तर प्रदेश की राजनीति और पुलिस‑प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि महिलाओं को बाल पकड़कर घर से घसीटकर बाहर खींचा जा रहा है, घर का सामान सड़क पर फेंका जा रहा है और दीवारें ध्वस्त हो रही हैं, जिसके बाद से पूरा इलाका भय और गुस्से से भरा हुआ है।

बुलंदशहर के थाना चोला क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार के साथ हुए क्रूर अत्याचार ने पूरे जनपद में सदमा और गुस्सा पैदा कर दिया है। वायरल वीडियो में महिलाओं को घर से खींचकर पीटते, घर का सामान बाहर फेंकते और दीवारों को ध्वस्त करते हुए देखा जा सकता है, जिसके बाद से गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है।


घटना की जड़: 80 साल पुराने घर का कब्जा

सुल्तानपुर गांव के इस ब्राह्मण परिवार का वह मकान लगभग 80 साल से पुश्तैनी संपत्ति था, जिसमें तीन‑चार पीढ़ियां लगातार रह रही थीं। दबंगों ने मकान का फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैनामा करवाकर परिवार को जबरन बेघर कर दिया और घर पर अपना कब्जा जमा लिया। पीड़ितों का कहना है कि पहले रंजिश और धमकियों के जरिए उनसे घर खाली करने पर मजबूर किया गया और जब उन्होंने विरोध किया, तो बदमाशों ने खुलेआम हिंसा शुरू कर दी

इस हमले में चारा काटने की मशीन उखाड़ी गई, गैस सिलेंडर फेंककर घर के भीतर डराने की कोशिश की गई और पूरा घर तहस‑नहस कर दिया गया। बार‑बार की घटना के बाद भी परिवार को न तो घर वापस दिलाया गया, न ही उनकी संपत्ति को क़ानूनी सुरक्षा दी जा सकी, जिससे वह आर्थिक और मानसिक तौर पर पूरी तरह टूट चुके हैं।


महिलाओं पर हैवानियत: बाल पकड़कर पीटा, कपड़े फाड़ने की कोशिश

इस घटना की सबसे दहला देने वाली बात यह है कि दबंगों ने निशाना जानबूझकर महिलाओं पर बनाया। वीडियो में दिखता है कि बदमाशों ने घर की महिलाओं को बाल पकड़कर घसीटते हुए खींचा और जमकर पीटा, जिससे उनकी इज्जत पर खुलेआम आंच आई। कुछ दबंगों ने महिलाओं के कपड़े तक फाड़ने की कोशिश की, जिसने घर के बुजुर्गों और बच्चों के लिए भय और शर्मिंदगी का भयानक माहौल खड़ा कर दिया।

इस हिंसा में कुल मिलाकर सात लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें चार महिलाएं गंभीर रूप से चोटिल हैं और उन्हें उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। घटना के दौरान घर में मौजूद बच्चे और बुजुर्ग रोते‑बिलखते रहे, लेकिन उनकी आंसुओं पर किसी का दिल नहीं पिघला; बल्कि दबंगों ने उन्हें धमकाकर आवाज भी बंद करा दी।


वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भड़का आक्रोश

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पूरे उत्तर प्रदेश सहित देशभर से #JusticeForBulandshahrFamily और ऐसे ही हैशटैग के जरिए लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। लोग इस घटना को न केवल गुंडागर्दी, बल्कि समाज की नैतिकता पर भी सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कठोर सजा की मांग कर रहे हैं।

सामाजिक संगठन और समाजसेवी संस्थाओं ने भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठाई है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एफआईआर दर्ज करने और दबंगों के खिलाफ विशेष जांच की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो गांव‑गांव में इसी तरह के आर्थिक दबदबे वाले घरों पर बलपूर्वक कब्जे की घटनाएं बढ़ती चली जाएंगी।


पुलिस और प्रशासन पर उठते सवाल

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने थाना चोला में बार‑बार आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया और कोई वास्तविक कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि दबंगों ने पुलिस को पैसे देकर अपनी तरफ मिला लिया और इसी कारण घटना के समय और बाद में भी पुलिस ने निष्क्रिय रहकर दबंगों को मौका दिया।

जब तक वायरल वीडियो नहीं आया, तब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच का दावा नहीं किया गया; लेकिन वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच का दावा करते हुए मामले को “संज्ञान में लिया” है। फिर भी परिवार का मानना है कि दबंगों के खिलाफ अभी तक कोई निश्चित गिरफ्तारी या कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उन्हें न्याय पाने के संबंध में गहरा डर और असुरक्षा महसूस हो रही है।


पीड़ित परिवार की मुख्य आर्थिक और क़ानूनी मांगें

पीड़ित ब्राह्मण परिवार का आग्रह सिर्फ गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे दोषियों को कठोर शासनात्मक और कानूनी सजा, घर का वापसी, और भविष्य में ऐसी हिंसा से बचाने के लिए व्यवस्थित सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 80 साल पुराना घर तो उनकी आर्थिक व भावनात्मक संपत्ति है, जिसे फर्जी दस्तावेजों के जरिए लेना नैतिक और कानूनी दोनों तरह से अपराध है।

परिवार स्थानीय प्रशासन से अपील कर रहा है कि मकान के बैनामा की कानूनी जांच कराई जाए, फर्जी दस्तावेज रद्द करवाए जाएं और घर का माल‑मालिक फिर से स्थापित किया जाए। इसके साथ‑साथ वे अपने और अन्य गरीब व वंचित परिवारों के लिए ऐसे ही “संपत्ति हड़पने” वाले दबंगों के खिलाफ एक विशेष निगरानी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी गरीब परिवार के साथ इस तरह का अत्याचार दोबारा न हो।



80 साल पुराने घर पर जबरन “बैनामा” और गरीब परिवार का बेघर

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सुल्तानपुर गांव में रहने वाला यह ब्राह्मण परिवार लगभग 80 साल से इसी मकान में रह रहा था और यह घर उनकी पुश्तैनी संपत्ति माना जा रहा था। दबंगों ने पहले धमकियां और दबाव बनाकर घर खाली करने के लिए तैयार करने की कोशिश की, लेकिन जब परिवार ने विरोध किया तो उनके खिलाफ बलपूर्वक फर्जी दस्तावेज के जरिए “बैनामा” कराया गया और मकान पर अपना कब्जा जमा लिया।

इसी दौरान दबंगों ने घर के भीतर धमकी भरा तांडव शुरू कर दिया, घर की चारा काटने वाली मशीन उखाड़ दी गई, गैस सिलेंडर फेंककर डराने की कोशिश की गई और बर्तन, चादर‑सामान बाहर फेंके गए। पीड़ितों का कहना है कि जानबूझकर घर को तहस‑नहस करके उन्हें बेघर करने की योजना बनाई गई थी, जिससे वे आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए हैं।


महिलाओं पर हैवानियत: बाल खींचकर पीटा, कपड़े फाड़ने की कोशिश

घटना का सबसे दहला देने वाला हिस्सा यह है कि दबंगों ने निशाना जानबूझकर घर की महिलाओं पर बनाया। वायरल वीडियो में दिखता है कि बदमाशों ने घर की महिलाओं को बाल पकड़कर घर से खींचकर बाहर लाया, जमकर लात‑घूंसे और लाठी से पीटा, जिससे उनकी इज्जत खुलेआम डगमगा गई। कुछ लोगों ने महिलाओं के कपड़े तक फाड़ने की कोशिश की, जिससे घर के बच्चों और बुजुर्गों के सामने यह दृश्य देखकर वे रोने‑बिलखने लगे।

इस हिंसा में परिवार के कुल सात लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें चार महिलाएं गंभीर रूप से चोटिल हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना को फोन से रिकॉर्ड करने वाले ग्रामीणों को धमकाकर वहां से भगा दिया गया, ताकि “प्रूफ” न बन पाए, लेकिन कुछ क्लिप्स फिर भी सोशल मीडिया में वायरल हो गईं।


वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर भड़का न्याय का आंदोलन

जैसे‑जैसे वीडियो फैला, रील्स, फेसबुक पोस्ट और ट्विटर‑X हैंडल्स पर #JusticeForBulandshahrFamily, #BulandshahrCrime और ऐसे ही हैशटैग के जरिए लाखों लोगों ने न्याय की मांग उठाई। लोगों ने इस घटना को न केवल गुंडागर्दी, बल्कि पुलिस‑प्रशासन की निष्क्रियता, फर्जी दस्तावेजों के जरिए गरीबों की संपत्ति हड़पने और ग्रामीण महिलाओं के खिलाफ दोषियों की संरक्षण‑प्रणाली का उदाहरण बताया।

सामाजिक संगठनों, ब्राह्मण सेवा समितियों और मानवाधिकार संस्थाओं ने भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठाई और कई स्थानीय और राजधानी‑स्तरीय नेतृत्व से मामले की विशेष जांच की मांग की। लोगों का तर्क है कि अगर तुरंत सख्त कार्रवाई और पब्लिक वे दबाव न बनता, तो यह मामला स्थानीय रूप से “सुलझा” दिया जाता और दबंगों को बचाने का षड्यंत्र जारी रहता।


पुलिस और इलाके के प्रशासन पर गंभीर सवाल

पीड़ित परिवार ने थाना चोला में बार‑बार आवेदन देकर एफआईआर दर्ज कराने और दबंगों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई, लेकिन उनका आरोप है कि हर बार उन्हें टाल दिया गया और असली मामले को “रोजमर्रा की लड़ाई‑झगड़ा” की श्रेणी में डाल दिया गया। ग्रामीणों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ लोग यहां तक कह रहे हैं कि दबंगों ने पैसे और रसूख के जरिए पुलिस को अपनी तरफ मिला लिया था, इसी कारण वायरल वीडियो के बाद भी गिरफ्तारियां या कड़ी कार्रवाई धीमी रही।

वायरल वीडियो के बाद जिला प्रशासन ने “जांच के लिए मामला संज्ञान में लिया गया” की घोषणा की, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि अभी तक उन्हें न तो घर वापस दिलाया गया है और न ही फर्जी बैनामा को रद्द कराने की कोई ठोस योजना दिखाई गई है। इससे उनमें एक बार फिर डर बना हुआ है कि अगर कार्रवाई ढीली रही, तो वे भविष्य में दबंगों के हत्यारों बन सकते हैं।


परिवार की क्यों जरूरी हैं तीन‑स्तरीय मांगें

पीड़ित परिवार ने अपनी मांगों को तीन स्तरों में रखा है: कानूनी न्याय, संपत्ति की वापसी और भविष्य की सुरक्षा।

  • कानूनी न्याय: उनका मुख्य आग्रह है कि दबंगों के खिलाफ गंभीर धाराओं (IPC की Section 447, 323, 506, 147, 149 आदि) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए, सजा निश्चित और कठोर हो, ताकि गांव‑गांव में ऐसे प्रकार दबंग खुलेआम गरीबों पर न टूट पड़ें।
  • संपत्ति की वापसी: वे जांच की मांग कर रहे हैं कि जिस दस्तावेज के आधार पर “बैनामा” का दावा किया जा रहा है, उसकी वैधता पर अदालत

Rakesh Pandey

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।