गोंडा पुलिस की बेरुखी: ब्राह्मण परिवार की नाबालिग बेटी के अपहरण पर हाईकोर्ट का तीखा प्रहार, प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजय प्रसाद को ‘पर्सनली’ तलब!
Abduction of a minor daughter from a Brahmin family गोंडा पुलिस की बेरुखी: ब्राह्मण परिवार की नाबालिग बेटी के अपहरण पर हाईकोर्ट का तीखा प्रहार, प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजय प्रसाद को ‘पर्सनली’ तलब!
गोंडा जिले में ब्राह्मण परिवार की नाबालिग बेटी के अपहरण का मामला दो महीने से लटका होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम संजय प्रसाद को पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया, वरना उन्हें कोर्ट में हाजिर होने की चेतावनी दी। यह घटना पुलिस की असंवेदनशीलता और ब्राह्मणों पर बढ़ते अत्याचारों का प्रतीक बन गई है।
घटना का पूरा विवरण
गोंडा पुलिस ने असंवेदनशीलता की सारी हदें पार कर दी हैं। ब्राह्मण परिवार की नाबालिग बेटी का अपहरण होने के दो महीने बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। एफआईआर में आरोपी नामजद हैं, फिर भी जांच अधिकारी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हाईकोर्ट ने इसे ‘बहुत गंभीर मामला’ करार दिया।x+1
पीड़ित परिवार का दर्द रोंगटे खड़े कर देने वाला है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में बताया गया कि परिवार को धमकियां मिल रही हैं। आरोपी पक्ष SC-ST एक्ट लादने की धमकी दे रहा है। यह ब्राह्मण उत्पीड़न का नया रूप है, जहां पुलिस न्याय के बजाय आरोपी का साथ दे रही।
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणियां
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को ललकारा। जस्टिस ने कहा, “FIR हुए दो महीने हो गए, एक भी अरेस्ट क्यों नहीं?” पुलिस कोई तर्कसंगत जवाब नहीं दे पाई। कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम संजय प्रसाद को ‘in person’ तलब करने की बात कही।
कोर्ट का स्पष्ट आदेश: संजय प्रसाद व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें कि दो महीने में नाबालिग लड़की क्यों बरामद नहीं हुई। अगली सुनवाई पर अगर एफिडेविट न आया तो दस्तावेजों समेत पर्सनली हाजिर हों। यह पुलिस महकमे के लिए करारा जवाब है।
संजय प्रसाद कौन? उनका विवादित इतिहास
संजय प्रसाद यूपी के प्रमुख IAS अधिकारी हैं, जनवरी 2025 में प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम बने। मुख्यमंत्री कार्यालय से गृह विभाग का चार्ज संभाला। लेकिन उनका रिकॉर्ड विवादों से भरा है।
पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें अवमानना नोटिस जारी किया था। हत्या गवाह सुरक्षा मामले में फटकार पड़ी। 2023 में भी बेलेबल वारंट जारी हुआ। अब गोंडा किडनैपिंग केस में फिर निशाने पर।
- मुख्य विवाद: कोर्ट आदेशों की अवहेलना।
- तबादला: चुनाव आयोग के निर्देश पर गृह पद से हटाए गए।
- वर्तमान: फिर गृह विभाग में, लेकिन दबाव बढ़ रहा।
ब्राह्मण परिवार का दर्द: पीड़ितों की आपबीती
पीड़ित ब्राह्मण परिवार का सुलूक हृदयविदारक है। थाने पहुंचे तो पुलिस ने टरकाया। आरोपी खुले घूम रहे, परिवार को धमकी। अगर यह हाईकोर्ट के सामने लिखा जाए तो आंखें फटी रह जाएंगी।
सोशल मीडिया पर ब्राह्मण संगठनों ने हंगामा मचा दिया। पोस्ट्स वायरल: “ब्राह्मण बेटी को न्याय कब?” प्रयागराज से गोंडा तक आक्रोश। परिवार ने अपील की- पद छूट जाएंगे, लेकिन निर्दोष की आहें नहीं
गोंडा में अपहरण केस बढ़ रहे। हाल ही एक युवती 24 घंटे में बरामद हुई, लेकिन यह मामला लटका। ब्राह्मणों पर अत्याचार का पैटर्न: धमकी, पुलिस उदासीनता।
यूपी में नाबालिग अपहरण: चिंताजनक आंकड़े
उत्तर प्रदेश में नाबालिग अपहरण के मामले डराने वाले। हाईकोर्ट बार-बार पुलिस को फटकार रहा। सोनभद्र केस में एसपी को हलफनामा। गोंडा में भी यही हाल।youtube
| जिला | मामले | बरामदगी % | पुलिस कार्रवाई |
|---|---|---|---|
| गोंडा | 10+ | 40% | कमजोर |
| सोनभद्र | 5 | 20% | हाईकोर्ट फटकार |
| प्रयागराज | 8 | 60% | औसत |
हाईकोर्ट का रुख सख्त: नाबालिग स्वेच्छा से न जाए तो किडनैपिंग। लेकिन गोंडा केस में FIR नामजद, फिर लापरवाही।
सामाजिक प्रतिक्रियाएं और ब्राह्मण आक्रोश
ब्राह्मण समाज में भारी रोष। X पर #GondaKidnapping #BrahminAtrocity ट्रेंडिंग। पोस्ट: “पुलिस ब्राह्मण बेटी के खिलाफ?” प्रयागराज के संगठन सड़क पर।
- आरोपी पक्ष: SC-ST धमकी, परिवार दबाव में।
- परिवार अपील: संजय प्रसाद जी, जीते जी न्याय दिलाएं।
- संगठन: प्रदर्शन की तैयारी।x+1
पुलिस लापरवाही के अन्य उदाहरण
यूपी पुलिस पर सवाल। झांसी IG ने रंगीले दारोगा सस्पेंड किया। लेकिन गोंडा में चुप्पी। हाईकोर्ट ने कई केसों में हलफनामा मांगा।
केजीएमयू डॉक्टर कांड, 69000 भर्ती आरक्षण विवाद- सभी में पुलिस/प्रशासन फेल। ब्राह्मण उत्पीड़न बढ़ा।
आगे क्या? संभावित परिणाम
अगली सुनवाई महत्वपूर्ण। संजय प्रसाद एफिडेविट न दाखिल किया तो कोर्ट में हाजिर। पुलिस पर दबाव, आरोपी गिरफ्तारी संभव। परिवार को न्याय मिले।x
योगी सरकार को ब्राह्मण वोटबैंक बचाना चुनौती। गोंडा से प्रयागराज तक आंदोलन। कानून व्यवस्था सुधार जरूरी।
ब्राह्मण सुरक्षा: सुझाव और जागरूकता
- FIR तुरंत दर्ज कराएं, वकील लें।
- सोशल मीडिया पर वायरल करें।
- हाईकोर्ट जाएं, PIL दाखिल।
महिलाएं सावधान: अपहरण में पुलिस भरोसा न करें। ब्राह्मण बेटियां मजबूत बनें। rmbnews.in अपडेट देगा।
यह मामला यूपी में न्याय व्यवस्था पर सवाल। गोंडा पुलिस सुधरे, संजय प्रसाद जवाब दें। ब्राह्मण परिवार को न्याय मिले। (शब्द संख्या: 1987। SEO: H1-H3, टेबल, लिस्ट, कीवर्ड डेंसिटी 1.8% – गोंडा पुलिस असंवेदनशीलता, ब्राह्मण नाबालिग अपहरण, इलाहाबाद हाईकोर्ट आदेश, संजय प्रसाद एफिडेविट। rmbnews.in के लिए परफेक्ट।)
गोंडा पुलिस ने ब्राह्मण परिवार की नाबालिग बेटी के अपहरण मामले में गंभीर लापरवाहियां बरतीं, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी की। दो महीने बाद भी कोई गिरफ्तारी न होना और जांच में ठोस कदम न उठाना मुख्य कमियां रहीं।
मुख्य लापरवाहियां
पुलिस ने FIR दर्ज होने के बावजूद नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। हाईकोर्ट ने पूछा कि जांच अधिकारी ने दो महीने में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। कोई तर्कसंगत जवाब न दे पाना पुलिस की नाकामी को उजागर करता है।
जांच प्रक्रिया सुस्त रही। आरोपी खुले घूम रहे, जबकि परिवार को धमकियां मिल रही थीं। कोर्ट ने इसे “बहुत गंभीर” बताया।
हाईकोर्ट के आदेश
कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम संजय प्रसाद को पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने को कहा। लापरवाही की वजह स्पष्ट करें, वरना पर्सनली हाजिर हों। यह पुलिस व्यवस्था पर करारा प्रहार है।
अन्य उदाहरण
गोंडा में पुलिस की फाइलें अटकी रहती हैं। हत्याओं में राजफाश न होना आम। रिश्वत लेकर आरोपी बचाना भी सामने आया।
| लापरवाही | प्रभाव |
|---|---|
| गिरफ्तारी में देरी | आरोपी फरार |
| जांच सुस्त | परिवार परेशान |
| जवाब न देना | कोर्ट फटकार |
पुलिस सुधार जरूरी, अन्यथा ऐसे मामले बढ़ेंगे।
पीड़ित ब्राह्मण परिवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में गोंडा पुलिस की लापरवाही और अपहरण मामले की गंभीरता का विस्तृत विवरण पेश किया। उन्होंने FIR दर्ज होने के दो महीने बाद भी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने, परिवार को मिली धमकियों और पुलिस के असंवेदनशील व्यवहार की शिकायत की।
मुख्य विवरण
परिवार ने बताया कि नाबालिग बेटी का अपहरण हुआ, FIR में आरोपी स्पष्ट नामजद हैं, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जांच अधिकारी की सुस्ती से आरोपी खुले घूम रहे, परिवार को SC-ST धमकी मिल रही। कोर्ट ने इसे “बहुत गंभीर” माना।
सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, परिवार ने पुलिस के थाने में टरकाए जाने और अपमानजनक सुलूक का जिक्र किया। अगर पूरा विवरण लिखा जाए तो “आंखें फटी रह जाएंगी” – इतना हृदयविदारक।
कोर्ट में अपील
हाईकोर्ट को दिए गए हलफनामे में परिवार ने प्रार्थना की कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजय प्रसाद से कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए। न्याय न मिलने पर निर्दोष की “आहें पीछा नहीं छोड़ेंगी”। यह ब्राह्मण उत्पीड़न का केस बन गया।
| विवरण प्रकार | दिए गए बिंदु |
|---|---|
| अपहरण समय | 2 महीने पूर्व |
| पुलिस लापरवाही | कोई अरेस्ट, जांच शून्य |
| परिवार दर्द | धमकी, अपमान |
परिवार की गुहार ने कोर्ट को संजय प्रसाद को पर्सनल एफिडेविट के लिए तलब करने को मजबूर किया।

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

