लखनऊ : यादव परिवार के 12 सदस्यों ने मुख्यमंत्री आवास के सामने दी आत्मदाह की धमकी, Misuse of SC/ST Act

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लखनऊ, 24 नवंबर 2025 Misuse of SC/ST Act

सोमवार सुबह लखनऊ का कालीदास मार्ग उस समय स्तब्ध रह गया जब एक यादव परिवार के बारह लोग (जिनमें छह नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं) मुख्यमंत्री आवास के मुख्य गेट के ठीक सामने पहुंचे और मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्मदाह करने की कोशिश की। परिवार का कहना है कि उन्हें जानबूझकर एक फ़र्ज़ी SC/ST एक्ट के मुकदमे में फंसाया जा रहा है, जबकि उनकी नाबालिग बेटी के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की कोशिश की गई।

परिवार ने चेतावनी दी कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे सबके सब यहीं ज़िंदगी खत्म कर लेंगे।घटना सुबह करीब साढ़े दस बजे की है। परिवार के मुखिया रामलखन यादव (52 वर्ष) ने बताया कि वे गोमतीनगर थाना क्षेत्र के चिनहट इलाके के रहने वाले हैं। उनके मुताबिक, पड़ोस में रहने वाले कुछ लोग (जो दलित समुदाय से हैं) ने उनके साथ पुरानी रंजिश के चलते 10 नवंबर की रात को उनकी 17 साल की बेटी के साथ अभद्रता करने की कोशिश की। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो उल्टा उन पर ही SC/ST एक्ट का मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

रामलखन यादव ने रोते हुए कहा,
“हमारी बेटी के साथ गलत हरकत की कोशिश हुई, हमने शिकायत की तो पुलिस ने हमीं पर केस ठोंक दिया। अब हमारे पूरे परिवार को जेल भेजने की तैयारी है। हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा। आज हम सब यहाँ मरने आए हैं। अगर मुख्यमंत्री जी हमारी बात नहीं सुनेंगे तो हम सब यहीं जल मरेंगे।”परिवार में शामिल छह नाबालिग बच्चों की उम्र 6 साल से 16 साल के बीच है। सबसे छोटी बच्ची (8 साल) ने मीडियाकर्मियों से कहा, “अंकल, हमें स्कूल जाना है, लेकिन पुलिस हमें पकड़ने आ रही है। हम मरना नहीं चाहते।

पुलिस की दलील और FIR की कॉपी

गोमतीनगर पुलिस ने 11 नवंबर को दलित पक्ष की शिकायत पर यादव परिवार के सात लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(s), 3(2)(va) के साथ IPC की धारा 323, 504, 506 और 354 लगाई है। FIR में आरोप है कि यादव परिवार ने दलित महिला और उसके परिवार को गाली-गलौज दी और मारपीट की। दूसरी तरफ यादव परिवार का दावा है कि असल में दलित पक्ष के युवकों ने उनकी बेटी को अकेला देखकर छेड़छाड़ की कोशिश की थी और जब विरोध हुआ तो झूठा केस कर दिया। परिवार ने अपनी बेटी का मेडिकल भी कराया है, जिसमें चशब्दों में चोट के निशान और मानसिक आघात का ज़िक्र है, लेकिन पुलिस ने उस शिकायत को आगे नहीं बढ़ाया।SC/ST एक्ट के दुरुपयोग का पुराना दर्दउत्तर प्रदेश में SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग की शिकायतें कोई नई नहीं हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून में संशोधन करते हुए तत्काल गिरफ्तारी और अग्रिम जमानत पर रोक लगाने की कोशिश की थी, लेकिन बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद संसद ने दोबारा पुराना कानून बहाल कर दिया। उसके बाद से “रिवेंज बुकिंग” के मामले लगातार बढ़े हैं।

लखनऊ के ही एक वकील संजय मिश्रा बताते हैं,
“मैंने पिछले पांच साल में कम से कम 200 ऐसे मामले देखे हैं जहाँ छोटी-मोटी कहासुनी या ज़मीन के विवाद में SC/ST एक्ट लगा दिया जाता है। ज्यादातर मामलों में चार्जशीट भी कमज़ोर होती है, लेकिन तब तक परिवार बर्बाद हो चुका होता है। समाज में तनाव बढ़ता है और अंत में कोर्ट से बरी भी हो जाते हैं, पर उसकी कीमत कौन चुकाता है?”मौके पर क्या हुआ?मुख्यमंत्री आवास के बाहर हंगामा होते ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। लखनऊ के डीसीपी (पूर्व) प्रशांत वर्मा खुद मौके पर पहुंचे और परिवार को समझाने की कोशिश की। परिवार की महिलाएं ज़ोर-ज़ोर से रो रही थीं और बच्चे डरे-सहमे थे। आख़िरकार पुलिस ने परिवार को मुख्यमंत्री आवास के अंदर ले जाकर CM के OSD से बात कराई। वहां परिवार को आश्वासन दिया गया कि उनकी शिकायत की निष्पक्ष जाँच होगी और अगर कोई गलत हुआ है तो कार्रवाई होगी।

परिवार के बड़े बेटे अजय यादव (26) ने कहा,
“हमें लिखित में चाहिए कि हमारा केस वापस होगा और असली दोषियों पर कार्रवाई होगी। वरना हम वापस नहीं जाएंगे।”शाम पांच बजे तक परिवार मुख्यमंत्री आवास परिसर में ही बैठा था। प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि DM और SSP को पूरी घटना की रिपोर्ट बनाने को कहा गया है।

ज़मीन पर बढ़ता आक्रोश Misuse of SC/ST Act

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। कई लोग लिख रहे हैं कि SC/ST एक्ट अब “ब्लैकमेल करने का हथियार” बन गया है। एक यूज़र ने लिखा,
“जब तक इस कानून में सुधार नहीं होगा, ऐसे परिवार बार-बार सड़क पर मरने को मजबूर होते रहेंगे।”वहीं दूसरी तरफ़ दलित अधिकार संगठन इसे “ब्राह्मणवादी मानसिकता का परिणाम” बता रहे हैं और कह रहे हैं कि पीड़ित पक्ष को ही दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है।

आखिरी सवाल

क्या यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई है या समाज में गहराती खाई का आईना?

क्या कानून को हथियार बनाने वालों पर लगाम लगेगी या फिर ऐसे और परिवार मुख्यमंत्री आवास के सामने मिट्टी का तेल लेकर खड़े होते रहेंगे?

यह सवाल अभी अनुत्तरित है। लेकिन आज लखनऊ की सड़क पर जो नज़ारा था, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोरने के लिए काफी था।

अनिल शुक्ला

अनिल शुक्ला स्पेशल करेस्पोंडेंस रिलाएबल मीडिया भारत बस्ती ,उत्तर प्रदेश है RMB में 10 वर्षो से रहकर पत्रकारिता कर रहे है।