भदोही में सनसनीखेज हत्याकांड : ग्राम प्रधान की शिकायत करने पर 70 वर्षीय ब्राह्मण बुजुर्ग की कार चढ़ाकर निर्मम हत्या – Brahmin Kamalkant Dubey brutally murdered
भदोही, 12 दिसंबर 2025 Brahmin Kamalkant Dubey brutally murdered
ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के धसकरी गांव में उस समय सनसनी फैल गई जब गांव के ही 70 वर्षीय बुजुर्ग कमलाकांत दुबे उर्फ बाबू भैया की तेज रफ्तार कार से कुचलकर बेरहमी से हत्या कर दी गई।
हत्या में इस्तेमाल हुई कार ग्राम प्रधान मनीष यादव के घर की बताई जा रही है। कमलाकांत दुबे ने कुछ महीने पहले ही ग्राम प्रधान मनीष यादव पर मनरेगा व अन्य सरकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर धांधली व अनियमितता का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को लिखित शिकायत की थी। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने जांच कराई और ग्राम पंचायत का सारा फंड रोक दिया था।
इसी रंजिश में प्रधान पक्ष द्वारा उनकी हत्या कराने की आशंका जताई जा रही है।घटना बुधवार देर रात करीब 9:30 बजे की है। कमलाकांत दुबे ज्ञानपुर बाजार में स्थित अपना मेडिकल स्टोर बंद करके साइकिल से घर लौट रहे थे। धसकरी मोड़ के पास अंधेरे का फायदा उठाते हुए एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो (नंबर UP65 AT 0786) ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कमलाकांत साइकिल सहित 20 मीटर दूर जा गिरे।
कार सवारों ने रुकने के बजाय रिवर्स करके दोबारा उन पर कार चढ़ा दी और फिर तेजी से फरार हो गए। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।परिजनों व ग्रामीणों ने जब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। हत्या में प्रयुक्त स्कॉर्पियो कार ग्राम प्रधान मनीष यादव के घर की निकली।
गाड़ी प्रधान के चालक व उनके करीबी रिश्तेदार अक्सर चलाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गाड़ी प्रधान के घर के बाहर ही खड़ी रहती है। हत्या के तुरंत बाद गाड़ी को गांव में देखी गई और फिर गायब हो गई। पुलिस ने गाड़ी को बरामद करने के लिए दबिश शुरू कर दी है।
Brahmin Kamalkant Dubey brutally murdered
कमलाकांत दुबे पिछले कई वर्षों से धसकरी गांव में सामाजिक कार्यों से जुड़े थे। उन्होंने अगस्त 2025 में जिलाधिकारी भदोही को लिखित शिकायत दी थी कि ग्राम प्रधान मनीष यादव ने मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय निर्माण व अन्य सरकारी योजनाओं में करोड़ों रुपए की धांधली की है। फर्जी मुस्तर रोल बनाकर, फर्जी बिल-वाउचर लगाकर लाखों रुपए का गबन किया गया।
शिकायत में कई सबूत भी संलग्न किए गए थे।जिलाधिकारी गौरांग राठी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में टीम गठित की गई। जांच में अनियमितताएं मिलने पर सितंबर महीने में ही धसकरी ग्राम पंचायत का समस्त फंड रोक दिया गया। सचिव को निलंबित कर दिया गया और प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद से मनीष यादव व उनके समर्थक कमलाकांत दुबे को लगातार धमकी दे रहे थे। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार मारपीट की धमकी मिली, लेकिन कमलाकांत नहीं डरे और न्याय की लड़ाई लड़ते रहे।हत्याकांड की खबर जैसे ही गांव में फैली, सैकड़ों लोग कमलाकांत दुबे के घर पहुंच गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कमलाकांत के बड़े बेटे संतोष दुबे ने बताया, “पिताजी ने सिर्फ गांव की भलाई के लिए आवाज उठाई थी।
उन्होंने किसी का पैसा नुकम नहीं किया। प्रधान ने फंड रोकने से बौखलाकर यह कायराना हरकत की है। हम इंसाफ चाहते हैं।” मृतक की पत्नी शांति देवी सदमे में हैं और बोल नहीं पा रही हैं।मृतक के तीन बेटे और दो बेटियां हैं।मामले में ज्ञानपुर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सेठी ने बताया कि तहरीर मिलते ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
धारा 302 भादवि की धारा 302 (हत्या) व 504, 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। ग्राम प्रधान मनीष यादव सहित 5-6 नामजद व अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गाड़ी की तलाश की जा रही है। जल्द ही आरोपी गिरफ्त में होंगे।वहीं समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष व स्थानीय नेता रामचंद्र यादव ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गुंडाराज चरम पर है।
एक ईमानदार बुजुर्ग की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। सरकार मौन है। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच व आरोपी प्रधान की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। भाजपा नेता भी मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।आज सुबह से धसकरी गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। लोग फुसफुसा कर कह रहे हैं – “बाबू भैया ने सच के लिए जान दे दी। अब देखते हैं न्याय मिलता है या नहीं।
” पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव लेने से इंकार कर दिया है और आरोपी की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही है।यह घटना एक बार फिर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की असुरक्षा को उजागर करती है। जब फंड रोकने मात्र से एक निरीह बुजुर्ग की जान ले ली गई तो आम आदमी भला कहां सुरक्षित है?
प्रशासन के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वह न सिर्फ आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाए बल्कि भ्रष्टाचार करने वालों में भय भी पैदा करे।

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

