हाय रे सत्ता की भूख: जब बेटे ने बाप को भरी सभा में लताड़ दिया – hunger for power
लखनऊ, 7 दिसंबर 2025- hunger for power
उत्तर प्रदेश की राजनीति ने कई नाटकीय मोड़ देखे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी के भीतर जो दृश्य 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आया, उसने हर उस व्यक्ति का दिल दहला दिया जो परिवार, मर्यादा और पिता-पुत्र के रिश्ते को पवित्र मानता है।
वह पल जब अखिलेश यादव ने अपने पिता और समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा मुलायम सिंह यादव के हाथ से माइक छीन लिया और क्रोध भरी आवाज में चिल्लाए – “पीछे हटो! माइक छोड़ो! तुमने अमर सिंह से लिखवाया! झूठ बोलते हो तुम!” – वह पल सिर्फ एक राजनीतिक झगड़ा नहीं था, वह एक बाप का सार्वजनिक अपमान था।उस दिन लखनऊ के लोहिया भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी।
मुलायम सिंह यादव अपनी पुरानी शैली में बोल रहे थे। अचानक अखिलेश खड़े हुए, उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था। अगले ही पल माइक उनके कब्जे में था और मुलायम सिंह यादव, जो कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता के चाणक्य कहे जाते थे, लाचार से खड़े रह गए। उनकी आँखों में आश्चर्य था, दर्द था, और शायद वह समझ भी नहीं पा रहे थे कि उनके लाड़ले बेटे ने उन्हें इतने लोगों के सामने ऐसा अपमानित कर दिया।
जिस बेटे के लिए कुर्बान किया सब कुछमुलायम सिंह यादव ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में एक ही सपना पाला था – कि उनका बेटा अखिलेश एक दिन उनकी विरासत को आगे बढ़ाएगा। इसके लिए उन्होंने अपने सगे भाई शिवपाल सिंह यादव को हमेशा पीछे रखा। उत्तर प्रदेश में कोई दूसरा बड़ा यादव नेता पैदा न हो, इसके लिए उन्होंने हर संभव कोशिश की।
रामगोपाल यादव को छोड़कर यादव खेमे में कोई दूसरा ध्रुव न बने, यह उनकी रणनीति का मूल मंत्र था।लोग कहते हैं कि मुलायम ने शिवपाल को कभी मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया। कई मौकों पर जब शिवपाल पार्टी में मजबूत स्थिति में थे, तब भी मुलायम ने आखिरी समय में फैसला पलट दिया। सब कुछ इसलिए कि “मेरा अखिलेश ही आगे बढ़े”।और बदले में क्या मिला?
वह दिन मिला जब उनका अपना बेटा उन्हें भरी सभा में “झूठा” कहे, माइक छीने और पीछे हटने को कहे।
औरंगजेब और शाहजहाँ की याद दिला दी hunger for power
उस दिन के बाद से सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही चर्चा थी – “औरंगजेब ने अपने बूढ़े पिता शाहजहाँ को आगरा के किले में कैद कर दिया था, अखिलेश ने तो अपने जीते-जागते पिता को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर दिया।”मुलायम सिंह यादव उस दिन मंच पर खड़े रहे। न कुछ बोले, न कुछ किया। बस चुपचाप देखते रहे। एक बूढ़ा शेर, जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश की सियासत पर राज किया, अपने ही बेटे के सामने असहाय हो गया।
योगी आदित्यनाथ की वह भविष्यवाणी सच हुई
2017 के चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए कहा था – “तुम तो अपने बाप के भी नहीं हुए!”
उस समय अखिलेश ने इसे राजनीतिक बयानबाजी कहा था। लेकिन उस माइक छीनने की घटना ने योगी के शब्दों को सौ फीसदी सत्य साबित कर दिया।
सत्ता की भूख ने रिश्ते निगल लिए
आज जब समाजवादी पार्टी फिर से एकजुट होने की बात कर रही है, तब भी पुराने कार्यकर्ता उस दिन को याद करके सिहर उठते हैं। एक वरिष्ठ सपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा – “नेताजी ने जो कुछ भी किया, अखिलेश के लिए किया। लेकिन सत्ता का लालच ऐसा होता है कि वह बाप-बेटे का रिश्ता भी खा जाता है।”
नियति का करारा थप्पड़
मुलायम सिंह यादव आज भले ही सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन उस दिन की याद शायद उनके दिल में आज भी जिंदा होगी। जिस बेटे को उन्होंने सिर-आँखों पर बैठाया, उसी ने उन्हें अपमान की आग में झोंक दिया।हाय रे नियति!
तू कितनी कठोर है।
जिसके लिए राज-पाट छोड़ा, उसी ने राजधर्म भुला दिया।
जिसके लिए भाई से रिश्ता तोड़ा, उसी ने पिता को मंच पर अकेला छोड़ दिया।शायद यही सत्ता का खेल है।
जहाँ कुर्सी से बड़ा कुछ नहीं होता।
न बाप, न भाई, न रिश्ते।
और उस दिन उत्तर प्रदेश ने देख लिया था –
सत्ता की भूख में इंसान कितना नीचे गिर सकता है।

राकेश पांडेय मुख्य संपादक रिलाएबल मीडिया भारत है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता में 20 वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

